मंगलवार रात हुए भीषण हादसे में भाखड़ा पुल के पूर्वी छोर पर हाईवे छह लोगों के खून से लाल हो गया। मृतकों में चार तो एक ही परिवार के सदस्य हैं। परिवार राजीखुशी घर से सफर पर निकला था लेकिन सफर अधूरा ही छोड़कर सब क्रूर काल के गाल में समा गए। परिवार के बाकी तीन सदस्य गंभीर घायल हालत में बरेली के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इस बीच कुछ जख्मी यात्रियों ने बताया कि रोडवेज बस का ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी दौड़ा रहा था।
जिला अस्पताल में भर्ती हादसे में घायल दिल्ली के कुलदीप का कहना है कि चालक शराब पीकर बस दौड़ा रहा था। बस में करीब 27 यात्री सवार थे। इनमें से ज्यादातर रात होने के कारण सो रहे थे। धनेटा फाटक के पास आगे खड़ी वॉल्वो बस में टक्कर लगने से लोग चीखने लगे। अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया और वॉल्वो में पीछे की तरफ बैठी कुछ सवारियां टूटे शीशे से रोडवेज बस में आ गईं। कुलदीप ने बताया कि उनका पैर बस की सीट और एक बोरी के बीच दबकर फंस गया था। बमुश्किल पैर निकला। करीब 25 मिनट के बाद पुलिस पहुंची तो लोगों की मदद से घायलों को निकालकर एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
उधर, तीन थानों के पुलिस कर्मी और धनेटा फाटक के आधा दर्जन लोग भीषण हादसे में घायलों को बसों से निकालने में घंटों जुटे रहे। क्रेन के जरिए बसों की सीटें बेहद सावधानी से काट-काटकर और बस को आड़ा-तिरछा कर घायलों को भारी मशक्कत से बाहर निकाला जा सका। भीषण हादसे में मोहल्ला सिकलापुर कस्बा व थाना मोहम्मदी जिला लखीमपुर खीरी के महबूब खां पुत्र जहीर खां और उनकी बीवी नूरजहां, 5 साल की मासूम बिटिया सिदरा, एक साल के दुधमुंहे बेटे अयान को अपनी जान गंवानी पड़ी। महबूब की 12 साल की बेटी रुशदा और 8 व 4 साल के दो बेटे अरमान, अदनान गंभीर रूप से घायल हैं। ये तीनों भी बरेली के अस्पताल में भर्ती हैं और जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इलाके में छह लोगों की मौत और तीन दर्जन से ज्यादा यात्रियों के घायल होने का भीषण हादसा हाईवे बनने के बाद पहली बार हुआ है। हादसा चूंकि रात के अंधेरे में हुआ और उस वक्त पूरा इलाका गहरी नींद के आगोश में डूबा हुआ था, लिहाजा पुलिस के अलावा इक्का-दुक्का लोग ही मौके पर पहुंच पाए। बहरहाल, आम तौर पर संवेदनहीनता के आरोप झेलने वाली पुलिस का मानवीय चेहरा इस हादसे में उजागर जरूर हुआ है। कई दरोगा और दर्जनों सिपाही न सिर्फ गहरी नींद से जागकर सूचना के चंद मिनटों में मौके पर पहुंच गए बल्कि उन्होंने बसों में फंसे घायल यात्रियों को बाहर निकालने और एंबुलेंस में बैठाने में भी सराहनीय भूमिका निभाई। वाल्वो बस के जिस तरह परखच्चे उड़े थे, वैसी हालत में सीटों पर फंसे घायलों को सही-सलामत बाहर निकालना बेहद कठिन काम था। लेकिन, पुलिस कर्मियों ने क्रेन की मदद से सीटों को फैलाकर उनमें फंसे घायल मुसाफिरों को घंटों की मेहनत के बाद बाहर निकलवाया। घायलों की चीखें सुनकर सोते से उठकर आए धनेटा फाटक के आधा दर्जन से ज्यादा लोगों ने भी इंसानियत का बेमिसाल जज्बा दिखाते हुए पुलिस कर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भरपूर मदद की और घायलों को एंबुलेंस तक पहुंचवाया।
पुलिसकर्मियों के साथ गांववालों ने भी बढ़ाए मदद के हाथ
भीषण हादसा होते ही दोनों बसों में सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। 100 मीटर दूर धनेटा फाटक से भी कई लोग मौके पर पहुंच गए और डायल 100 पुलिस को फोन किया। सूचना मिलते ही 0196 पुलिस वैन और फतेहगंज पश्चिमी थाना प्रभारी रघुराज सिंह, चौकी इंचार्ज अमरपाल सिंह, एसआई महावीर सिंह, गौरव त्यागी, कुलदीप सिंह और मीरगंज, शाही थानों की पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से मृतकों और घायलों को सरकारी, निजी एंबुलेंसों से जिला अस्पताल और शहर के प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने क्रेन की मदद से दोनों बसों को थाने भिजवाया है। परिवहन निगम के अधिकारियों ने भी थाने पहुंचकर दुर्घटनाग्रस्त बसों का जायजा लिया और पुलिस से जरूरी जानकारी जुटाई।
इस बार फोन नहीं किया था
हादसे में जान गंवाने वाले सीतापुर के लहरपुर निवासी सईदउर्रहमान के पिता सैदुर्रहमान ने बताया कि सईद नोएडा में एक मोटर कंपनी की सर्विस एजेंसी में काम करता था। तीन महीने से वह छुट्टी लेकर गांव नहीं आया था। सोमवार को वह घर आ रहा था। हार बार आने से पहले फोन करता था, लेकिन इस बार उसने फोन नहीं किया। उसकी पत्नी शाहीन और घर के सभी लोग उसका इंतजार करते रहे और उसकी मौत की सूचना पहुंची तो कोहराम मच गया। सईद की तीन साल पहले ही शादी हुई थी। उसका एक साल का बेटा भी है।