आंवला। उड़ीसा से अपहरण कर लाई गई नाबालिग लड़की को आंवला में बीस हजार में बेच दिया गया। पच्चीस दिसंबर को अपहृत इस लड़की ने किसी तरह अपने परिजनों को इसकी सूचना दी तो उड़ीसा पुलिस ने आंवला में छापा मारकर लड़की को बरामद कर लिया है। लड़की के गांव के ही युवक ने उसका अपहरण किया था और मीरगंज में रह रही अपने बहन के आंवला निवासी रिश्तेदार से सौदा कर दिया था जहां वह पत्नी बनाकर रखे हुए था।
उड़ीसा के जिला बालेश्वर के गांव की नाबालिग लड़की के अपहरण का मुकदमा उसके पिता ने 25 दिसंबर को लिखवाया था। लड़की ने किसी तरह मौका पाकर अपने परिवार के लोगों को फोन करके बता दिया कि गांव का ही लम्बोदर बहरा उसे अगवा करके बरेली ले आया है। यहां उसने उसे बीस हजार रुपये में बेच दिया है। पुलिस ने पिता के कहने पर लम्बोदर को गिरफ्तार करने के बाद कड़ाई से पूछताछ की तो वह टूट गया। लम्बोदर ने बताया कि वह लड़की को अगवा करके मीरगंज के गांव जमुना में रहने वाली अपनी बहन गायत्री पत्नी जगदीश के घर ले गया था। वहां उसने गायत्री के पति जगदीश से मिलकर लड़की को उसके ममेरे भाई दीनदयाल, निवासी रामनगर(आंवला) को बीस हजार रुपये में बेच दिया। उड़ीसा के इंस्पेक्टर नरहरि मलिक ने मीरगंज पुलिस की मदद से पहले मीरगंज के जमुना गांव स्थित गायत्री के घर छापा मारा, लेकिन वह वहां नहीं मिली। यहां के बाद उड़ीसा पुलिस आंवला थाने की फोर्स की मदद से दीनदयाल के घर रामनगर पहुंच गई। वहां से पुलिस ने उड़ीसा की लड़की को बरामद कर लिया और साथ ले गई। लड़की के मामा भी साथ आए थे। इंस्पेक्टर ने बताया कि वह लड़की को कोर्ट में पेश करके उसे बयान कराएंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
जगदीश और दीनदयाल भी बनेंगे मुल्जिम
-उड़ीसा पुलिस का कहना है कि मानव तस्करी के इस मामले में गायत्री के पति जगदीश और उसके ममेरे भाई दीनदयाल को भी मुल्जिम बनाया जाना है। जगदीश ने लड़की को बेचने में लम्बोदर की मदद की है। जबकि दीनदयाल ने नाबालिग लड़की को खरीदकर शादी करके पहला अपराध किया। दूसरा अपराध उनका नाबालिग लड़की से शारीरिक संबंध बनाना है। कानूनन यह अपराध रेप की श्रेणी में आता है।
मुझे बंधक बनाकर रखते थे
रामनगर से बरामद होने के बाद लड़की ने पुलिस को बताया कि दीनदयाल उसे पत्नी की तरह रखता था। घर से बाहर जाने की उसे इजाजत नहीं थी। उसे बंधक बनाकर रखा जाता था। किसी से बात तक करने की इजाजत नहीं थी। आसपास की महिलाओं को यह कहकर बात करने से मना कर दिया जाता था कि यह कुछ समझ नहीं पाती है।