आशा ज्योति केंद्र में स्थापित रिपोर्टिंग चौकी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से नोटिस भेजा गया है। एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाना से लेकर अफसरों के पास तक भटकने वाली महिलाओं को राहत पहुंचाने के लिए चौकी बनाई गई थी। पर चौकी पर बीते साढ़े पांच महीने में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। विभाग ने नोटिस भेजकर इसका कारण जानना चाहा है। इसके अलावा 24 घंटे सहायता के लिए खुली चौकी कई महीनों से सिर्फ 10 घंटे ही खुल रही है। यही हाल केंद्र में काम कर रहे अन्य कर्मियों का भी है। ऐसा तब है जब प्रदेश सरकार इस केंद्र पर हर महीने लाखों रुपए खर्च कर रहा है पर स्थानीय स्तर पर नोडल अफसर की लापरवाही से व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ सकी हैं।
0 खुद डरे हुए हैं सुरक्षा के जिम्मेदार
रिपोर्टिंग चौकी की हालत हास्यास्पद है। यूं तो महिला सुरक्षा का भार यहां तैनात महिला पुलिस बल पर है। अभी तक चौकी का प्रभार देख रहीं एसआई शारदा चौधरी 16 अगस्त को ट्रांसफर होकर लखनऊ चली गईं। अभी नए प्रभारी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। हालांकि अस्थायी तौर पर यह जिम्मेदारी रेनू पाल देख रही हैं। इस केंद्र में अब एक दरोगा, चार कांस्टेबल और दो होमगार्ड तैनात हैं।
अपने काम की खबर नहीं
आशा ज्योति केंद्र में महिला सामाख्या, एक्शन ऐड, सीआईसी (क्राइसेस इंटरवेशन सेंटर) केंद्र भी खुले हुए हैं। पर, अभी तक इन केंद्रों को मुख्यालय की ओर से निर्धारित काम के दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। केंद्र खुले साढ़े पांच माह हो चुका है, इक्का-दुक्का केस हर महीने केंद्र में आ रहे हैं। सीआईसी की कीर्ति ने बताया कि काम की स्थिति में जो संशय है उस पर मुख्यालय के अधिकारियों से बात की जाएगी। उन्होंने बताया कि अगले महीने मंत्रालय की ओर से केंद्र का दौरा होना है, तब वे सभी कर्मी अपनी समस्याएं रखेंगे।