सीएमओ दफ्तर के एक बाबू के पास एक झोलाछाप डाक्टर की शिकायत आई तो वह उसे बचाने में जुट गया। उसने शिकायत की फोटोकापी झोलाछाप तक पहुंचा दी। इस बीच झोलाछाप डॉक्टर ने पहले एख नेता से दबाव बनाने का प्रयास किया और फिर सीधे धमकी देने लगा। शिकायकर्ता ने धमकी मिलने पर सीएमओ तक मामला पहुंचाया तो जांच बैठा दी गई। बाबू का पटल भी बदल दिया गया है।
भमौरा के मजनूपुर गांव के समीरउद्दीन ने शिकायत की थी कि मंडौरा गांव में एक झोलाछाप बंगाली क्लीनिक चलाता है। उसका कं पाउंडर नदीम है। केमिकल से घायल हुए लड़के के इलाज के लिए बंगाली डॉक्टर के क्लीनिक पहुंचा तो कंपाउंडर नदीम ने 50 हजार रुपये का इस्टीमेट बताया। बेटे के इलाज के दौरान दो किश्त में उसने 50 हजार रुपये दे दिए लेकिन उसकी हालत सही होने के बजाय बिगड़ गई। हाथ और पैर कटने की नौबत आने पर उसे शहर के प्राइवेट अस्पताल में ले जाकर जान बचाई गई। यहां इलाज में उसके पांच लाख रुपये खर्च हो गए। शिकायतकर्ता समीरउद्दीन ने बंगाली डॉक्टर और कंपाउंडर की शिकायत सीएमओ ऑफिस में कर दी। सीएमओ ने संबंधित काउंटर देख रहे लिपिक पीयूष से कार्रवाई को कहा। आरोप है कि पीयूष ने शिकायती पत्र झोलाछाप डॉक्टर तक पहुंचा दिया। इस पर झोलाछाप शिकायतकर्ता को ही धमकाने लगा। इस फर्जी डॉक्टर ने अपने नजदीकी सपा नेता का इस्तेमाल किया और शिकायत वापस लेने का दबाव डलवाया गया। इससे डरे समीरउद्दीन ने फिर से सीएमओ को जानकारी दी। सीएमओ डॉ. विजय यादव ने कार्रवाई करते हुए बाबू को पटल से हटा दिया है। साथ ही इस मामले की जांच शुरू करा दी है।
- भरे पड़े हैं झोलाछाप, कार्रवाई होती नहीं
जिले में झोलाछाप डॉक्टर भरे पड़े हैं। जब इनके कथित छापे पड़ते हैं तो सीएमओ की टीम को ये मिलते नहीं है। पिछले दो साल में कई शिकायतें ऐसे फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ आई है। लेकिन कार्रवाई बहुत कम मामलों में ही हुई। सीबीगंज में 41 फर्जी डॉक्टरों की शिकायत वहां के लोगों ने की। इनमें से किसी का भी रजिस्ट्रेशन नहीं था। एयरफोर्स के पास हिना क्लीनिक पर कार्रवाई शिकायत के तीन साल बाद हुई।
कोट
पीयूष झोलाछाप डॉक्टराें के शिकायत संबंधी मामलाें का पटल देख रहे थे। उनके खिलाफ कई शिकायतें आई हैं। वह छुट्टी भी बहुत ले रहे हैं इसलिए उनका पटल बदल दिया है।
डॉ. विजय यादव, सीएमओ
- 15 साल से तैनात हूं ऐसी गलती क्यों करूंगा
लिपिक पीयूष सक्सेना का कहना है कि वह यह पटल पिछले 15 सालों से देख रहे हैं आज तक कोई शिकायत नहीं आई। लेकिन झूठा आरोप लगा है। मैं शिकायती पत्र किसी को क्यों देने लगा। मैं छुट्टी पर भी चल रहा हूं।