मैं कभी बदलता नहीं, पर अंधरे से डरता हूं मैं मां... तारे जमीन पर फिल्म का यह गीत बच्चे के डर को बयां करता है। गुरुग्राम में रायन इंटरनेशनल स्कूल की घटना के बाद ऐसे हालात पैदा हो गए हैं कि अगर बच्चा घर जरा देर से आए, या गुमसुम लगे या उसके व्यवहार में बदलाव नजर आए तो मां अनहोनी के डर से सिहर उठती है। ऐसे हालात मां को झकझोर कर रख देते हैं। अब मम्मी-पापा की चिंता अपने लाडले के प्रति ज्यादा बढ़ गई हैं। पहले बच्चा कुछ मिनट लेट भी घर पहुंचता तो ज्यादा फिक्र नहीं होती थी पर अब एक मिनट भी लेट हो जाए तो सांसें थम जाती हैं। घर की दहलीज से कदम बाहर जाते ही ध्यान बच्चे पर ही रहता है। मन तब तक शांत नहीं होता जब तक बच्चा स्कूल से घर न आ जाए। गुरुग्राम की घटना के बाद जिनके बच्चे बसों और वैन से जाते थे उनमें अधिकतर ने ड्राइवर, कंडक्टर और ऑनर्स से मिलकर सुरक्षा का जायजा जरूर लिया। बच्चों को भी आगाह किया कि अगर कोई बात हो तो तुरंत घर बताएं या टीचर्स को बताएं। इसके अलावा बस में कैसे जाना है, कैसे बैठना है, शरारत नहीं करनी है, जैसी बातें भी बताई।
बच्चा गुुमसुम हो तो तुरंत करें बात
स्कूल संचालक भी अपने यहां सुरक्षा का खाका मजबूत करने में जुट गए हैं। गुरुग्राम की घटना के बाद जीआरएम, बीबीएल, बिशप कोनरॉड, एसआर इंटरनेशनल, पदमावती एकेडमी, अल्मा मातेर, विद्या भवन, माधव राव सिंधिया, डीपीएस समेत सभी स्कूलों ने अपने यहां स्टाफ के साथ बैठक की। सुरक्षा के मुद्दे पर मंथन किया और हिदायत दी कि अगर कुछ गड़बड़ होती है तो किस स्तर तक की कार्रवाई हो सकती है। शिक्षकों को बताया कि वह बच्चों पर नजर रखें। अगर कोई बच्चा थोड़ा भी असामान्य या शांत दिखे तो तुरंत बात करें। बस में तब तक शिक्षक मौजूद रहें जब तक सारे बच्चे उतर न आएं। बीबीएल के प्रशासनिक अधिकारी दीपक अग्रवाल बताते हैं कि बच्चों को भी शिक्षक गुड और बैड टच के बारे में बता रहे हैं। दूसरी तरफ अभिभावकों को भी अवगत कराया है कि बच्चों से संवाद कायम रखें। जीआरएम के प्रबंधक राजेश अग्रवाल जौली बताते हैं कि सारे स्टाफ से वार्ता की। अनजान व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। बच्चों को भी जागरूक कर रहे हैं। एसआर इंटरनेशनल स्कूल में तो निर्देश दिए गए हैं कि कम उम्र के न ड्राइवर रखे जाएंगे और न ही हेल्पर। बिशप कोनरॉड में बाहरी व्यक्ति आईडी जमा कराकर ही अब अंदर जा सकता है।
बच्चों को उठना-बैठना तक सिखा रहे हैं
मेरी दो बेटियां सेंट मारिया में पढ़ने जाती हैं। एक कक्षा नौ और छोटी वाली कक्षा दो में पढ़ती है। दोनों बस से स्कूल जाती हैं। रायन स्कूल वाली घटना के बाद सच कहूं तो बच्चियां जैसे ही घर से बाहर जाती हैं तो उनकी फिक्र सताने लगती है। हालांकि बस के ड्राइवर से लेकर कंडक्टर और ऑनर्स से हम समय-समय पर बातचीत भी करते हैं। बच्चियों से भी बात करते हैं कि कैसे बस में बैठना है। अगर कोई बात हर्ट करे तो तुरंत बताएं। अपने टीचर्स को बताएं। स्कूल से घर आने तक अब ज्यादा टेंशन रहती है।
-डॉ. नीलम, अभिभावक
मन टटोलती हूं बच्चों का
मेरी दो बेटियां सेंट मारिया स्कूल में पढ़ती हूं। मैं खुद भी टीचर हूं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर तो हमेशा ही चिंता रहती है, लेकिन वर्तमान में जिस तरह से स्कूलों में घटनाएं बढ़ रही हैं इससे पैरेंट्स की चिंताएं ज्यादा बढ़ रही हैं। सच कहूं तो मेरी बच्चियां जब तक घर नहीं आ जातीं तब तक बहुत टेंशन रहती है। आए दिन कहीं न कहीं घटना हो रही है। वैन से बच्चियां स्कूल जाती हैं, मैं लगातार उनसे बात करती हूं। बच्चे जब भी स्कूल से आते हैं, मैं उनसे हर तरह की बात करती हूं। मसलन, स्कूल में क्या हुआ, आने में कोई दिक्कत तो नहीं। बातों बातों में बच्चे के मन का हाल जानते हैं ताकि उनके मन में कोई बात है तो वह बता दें।
- सुचि खंडेलवाल, अभिभावक
बच्चे लेट हों तो टेंशन हो जाती है
एक बेटी कक्षा छह और दूसरी कक्षा आठ में माधव राव सिंधिया में पढ़ती है। पहले तो मैं खुद ही इनको स्कूल छोड़कर आता था, अब उन्हें साइकिल दिला रखी है। जिस तरह माहौल खराब हो रहा है उससे टेंशन तो होती है। हम तो समय-समय पर स्कूल भी जाते हैं और शिक्षकों से तथा स्कूल प्रबंधन से बात करते हैं। गुरुग्राम वाली घटना जहन में हमेशा कौंधती रहती है। अब बेटियां स्कूल जाती हैं तो उनका ध्यान जहन से जाता ही नहीं। थोड़ी भी देर होती है तो टेंशन होने लगती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूलों और स्कूल वाले रास्ते में इंतजाम होने चाहिए।
-तपन कुमार वर्मा, अभिभावक