तंग झोपड़ी.. घुटने मुड़े, आंखें बंद और जुबान भी अंदर। घटनास्थल के हालात तो नहीं बता रहे कि महिला ने आत्महत्या की है लेकिन पुलिस अपनी झोपड़ी में फंदे पर लटकी महिला की लाश उतारने के बाद फैसला सुना दिया है कि यह आत्महत्या है। हत्या की ओर इशारा कर रहे हालात की गुत्थी तो बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद ही सुलझेगी।
कस्बे के मुख्य मार्ग पर ब्लाक दफ्तर के सामने मजदूर सुरेश उर्फ डिब्बा पिछले दो दशक से मय परिवार झोपड़ी डालकर रहता है। सुरेश की पत्नी कमला ने मंगलवार सुबह आलू बैगन की सब्जी बनाई। पति के साथ ही दस साल के पुत्र अर्जुन, पांच साल की बेटी कोमल और तीन साल की काजल के साथ सबने मिलकर खाना खाया। इसके बाद सुरेश बेटे अर्जुन और छोटी पुत्री काजल को लेकर मजदूरी करने चला गया। घर पर कमला और 5 साल की बेटी कोमल रह गए थे। पुलिस के मुताबिक सुबह करीब 10.30 बजे कमला ने झोपड़ी की बल्ली में दुपट्टे का फंदा बांधा और उस पर लटक कर जान दे दी। वहां मौजूद उसकी बेटी कोमल अपनी मां को फांसी के फंदे पर लटकता देखकर जोर जोर से रोने लगी। उसके रोने की आवाज सुनकर इधर से गुजरने वाले राहगीर झोपड़ी में पहुंच गए। पुलिस ने शव फंदे से उतारा। सीओ नरेश कुमार ने कोमल से पूछताछ की। सीओ के मुताबिक कमला शराब की आदी थी। सुबह भी उसने शराब पी थी। पति और बेटे जब मजदूरी करने चले गए तो उसने फांसी के फंदे पर लटककर जान दे दी।
हजम नहीं हो रही पुलिस की कहानी
तीन बच्चों की मां बिना किसी वजह से फांसी के फंदे पर लटकर जान दे देगी। ये बात आसानी से हजम होने वाली नहीं है। महिला के शव का पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया। पुलिस ने मामले की तह में जाने से पहले ही गरीब महिला के फांसी के फंदे पर लटकने को आत्महत्या मान लिया। पुलिस की इस कहानी को परिवार समेत आस-पास के लोग भी आसानी से हजम नहीं कर पा रहे हैं।
‘प्रथम दृष्टया ये मामला आत्महत्या का ही लगता है। अभी महिला के शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो भी आएगा, उसी आधार पर मुकदमा दर्ज करेंगे।’ राजवीर शर्मा, एसओ नवाबगंज थाना