बगैर डिग्री के डॉक्टर बन बैठी और अस्पताल भी खोल लिया। स्वास्थ्य विभाग तो आंखें मूंदे बैठा रहा लेकिन प्रसव के दौरान दो नवजात शिशुओं की मौत के बाद इस फर्जी डॉक्टर के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए तो पुलिस ने सोमवार को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। फर्जी डॉक्टर की मदद करने वाले एक रिटायर्ड डॉक्टर को भी पुलिस तलाश कर रही है।
करगैना के पास अमरनाथपुरम कॉलोनी में रहने वाली राधा शर्मा ने कुछ समय पहले यह मैटरनिटी सेंटर खोला था। राधा खुद को लेडी डॉक्टर बताते हुए अपने सेंटर पर गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी करती थी जबकि उसके पास कोई डिग्री नहीं थी। सात दिसंबर 2013 में हाफिजगंज के हरहरपुर के अशरफ ने अपनी गर्भवती पत्नी इशरत जहां को राधा शर्मा के सेंटर में भर्ती कराया। जहां डिलीवरी के दौरान इशरत के नवजात शिशु की मौत हो गई। अशरफ ने राधा शर्मा के गलत तरीके से डिलीवरी कराने के कारण नवजात बच्चे की मौत होने का आरोप लगाते हुए अदालत के आदेश के जरिये 21 मई 2014 को थाना सुभाषनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी कि सात जनवरी 2015 को राधा के सेंटर में एक और नवजात बच्चे की मौत हो गई। बच्चे के पिता बंशीनगला निवासी बबलू ने भी राधा शर्मा पर लापरवाही से डिलीवरी करने का आरोप लगाते हुए नवजात की मौत का जिम्मेदार ठहराया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद छानबीन की तो पता चला कि राधा शर्मा के पास मेडिकल प्रेक्टिस करने के लिए कोई डिग्री ही नहीं है। पुलिस ने सोमवार को राधा शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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सर्टिफिकेट कोर्स पर चला रही थी मैटरनिटी सेंटर
एसओ सुभाषनगर जेपी यादव ने बताया कि राधा शर्मा के पास राष्ट्रीय माड्यूलर रोजगार परक कौशल प्रमाण पत्र मिला जो कानपुर के राष्ट्रीय माड्यूलर रोजगार परक कौशल केंद्र कार्यालय से एक अप्रैल 2010 को जारी हुआ है। इसी पर राधा शर्मा मैटरनिटी सेंटर चला रही थी। एसओ ने बताया कि विवेचना के दौरान सीएमओ से भी पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि इस प्रमाण पत्र के जरिये किसी डॉक्टर का सहयोग किया जा सकता है, लेकिन खुद डिलीवरी नहीं। इससे साफ हो गया कि राधा फर्जी डॉक्टर है और अवैध तरीके से मैटरनिटी सेंटर चला रही है। उसने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सेंटर बंद कर दिया था। एसओ ने बताया कि मैटरनिटी सेंटर चलाने में जो रिटायर्ड डॉक्टर सहयोग कर रहा था, उसका पता लगाया जा रहा है।