बरेली। बिथरीचैनपुर के गांव में एक किशोरी की संदिग्ध हालात में हुई मौत के बाद उसके पिता और अन्य परिजन गुपचुप अंतिम संस्कार कर रहे थे। इसी दौरान पिता से अलग रह रही मां पुलिस को लेकर वहां पहुंच गई और बेटी की अधजली लाश चिता से उतरवा ली। उसने आरोप लगाया कि बेटी की हत्या कर उसके ही पति ने की और वे लोग सुबूत मिटाने के लिए लाश जला रहे थे। पुलिस ने अधजला शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
बिथरीचैनपुर क्षेत्र के गांव सिमरा अजूबा निवासी पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड मेठ राम चंद्र की बेटी सरोज की शादी वर्ष 1998 में इज्जतनगर क्षेत्र के गांव अब्दुल्लापुर माफी निवासी सूरजपाल से हुई थी। करीब पांच साल पहले दंपति में विवाद हो गया। सरोज ने सूरजपाल पर मुकदमा दर्ज करा दिया और अपने पिता के घर मायके में रहने लगी। वह अपने साथ छह साल की छोटी बेटी सुनैना को मायके ले आई, जबकि बड़ी बेटी 15 वर्षीय अंजलि और 11 वर्षीय बेटे अरुण को पिता सूरज पाल ने अपने पास रोक लिया था और किसी अन्य महिला से दूसरी शादी कर ली।
बताया जाता है कि सौतेली मां अंजलि को प्रताड़ित करती थी। यह देखते हुए सूरज पाल ने अंजलि की शादी कैंट के गांव चनहेटा से तय कर दी थी। अंजलि अपनी मां सरोज देवी को भी शादी की बात बताकर उसे बुलाना चाहती थी, लेकिन सूरजपाल इस बात पर राजी नहीं था। इसी को लेकर पिता पुत्री और सौतेली मां में झगड़ा होता रहता था। शनिवार शाम पांच बजे सरोज को सूचना मिली कि उसकी बेटी अंजलि का शव फांसी के फंदे से उतारकर सूरजपाल और उसके परिवार के मनोहर, लोटन, जितेंद्र, पप्पू, राधे श्याम जलाने की कोशिश कर रहे हैं। तभी सरोज देवी अपने मायकेवालों के साथ अब्दुल्लापुर पहुंच गई। उसकी सूचना पर इज्जतनगर पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस की मदद से अंजलि का शव जलती चिता से उतारकर पोस्टमार्टम को भेजा गया। सरोज का कहना है कि उसकी पुत्री को फांसी पर लटकाकर मारने के बाद सबूत मिटाने को शव जलाने की कोशिश की। एसओ सतेंद्र यादव ने बताया कि बच्ची का अधजला शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सरोज की तहरीर के आधार पर आरोपी सूरज पाल और उसके परिवार वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।