बिथरी चैनपुर थाने के आलमपुर गजरौला में बच्चों के झगड़े में फौजी के पिता की जान ले ली। झगड़ा तीन दिन पहले हुआ था। फौजी के पिता सेना अस्पताल में भर्ती थे। शनिवार देर रात मौत होने पर घर वाले भड़क गए। केस को हत्या में तरमीम करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर उन्होंने थाने पर प्रदर्शन की कोशिश की। बाद में फोर्स की मौजूदगी में शव को दफनाया गया।
गांव के अख्तर बैंकों से डनलप आदि के लिए लोन दिलाने के लिए डीलर का काम करते थे। आठ जनवरी को उनके भाई अफसर के बच्चों से पड़ोसी हसीमुद्दीन के बच्चों का झगड़ा हो गया। अख्तर ने बीचबचाव कर मामला शांत कर दिया। आरोप है कि नौ जनवरी को हसीमुद्दीन और उसके परिवार के छह लोगों ने अख्तर के घर पर हमला बोल दिया। अख्तर के सिर में रॉड और लाठियां मारी गईं। उनके भतीजे नदीम और इरशाद भी घायल हो गए। अख्तर की पत्नी सरबरी बेगम की ओर से सभी छह आरोपियों के खिलाफ हत्या की कोशिश की रिपोर्ट बिथरी थाने में दर्ज कराई गई। अख्तर को पहले जिला अस्पताल फिर प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुणे में सेना की इंजीनियरिंग कोर में आर्मोरर पद पर तैनात बेटा मुख्तर पहुंचा तो उसने उन्हें मिलिट्री हास्पिटल में भर्ती करा दिया। शनिवार देर रात अख्तर ने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम में हेड इंजरी से मौत की पुष्टि हुई। परिवार वाले शव लेकर थाने पहुंचे और हत्या में केस तरमीम करने की मांग करने लगे। पुलिस ने इसे गैर इरादतन हत्या बताया तो घरवाले भड़क गए। उन्होंने प्रदर्शन की कोशिश की। हालांकि प्रभारी एसओ केके शर्मा ने जांच की बात कहकर समझाया और साथ लेकर इनके गांव चले गए। देर शाम भारी पुलिस की मौजूदगी में शव दफनाया गया। मृतक पक्ष ने आरोप लगाया कि तीन दिन से आरोपी यहीं थे पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। प्रभारी एसओ ने कहा कि आरोपी फरार हैं, इन्हें जल्दी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
दोनों परिवारों में चल रही है रंजिश
बताया जा रहा है कि अख्तर के पिता अकबर को 50 साल पहले यहां ननिहाल में 40 बीघा जमीन मिली थी। हसीमुद्दीन के पिता हशमत आदि ननिहाल पक्ष से थे। उन्होंने जमीन अपनी बताते हुए केस दर्ज किया था। तभी से दोनों परिवारों में रंजिश चल रही थी। इसमें कई बार समझौता हुआ और टूट गया।