बरेली।
बारिश होने के बाद शहर के 443 जर्जर भवनों में रहने वाली सैकड़ों जिंदगियां दरकती दीवारों के बीच खतरे में रहने को मजबूर हो जाती है। खतरा का भांपकर कई भवन खाली हो चुके हैं, लेकिन इन भवनों के करीब रहने वाले जर्जर इमारतों के खौफ से बाहर नहीं निकले हैं। बाजदारान मोहल्ले में दो मंजिला मकान के ढहने के बाद मलबे में दबे तीन मासूमों की जिंदगियों पर संशय बनने के बाद एक बार फिर इन खतरनाक भवनों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। वहीं नगर निगम दिखावटी नोटिस बारिश शुरू होने से पहले जारी करके खानापूर्ति कर चुका है। अब अगर जर्जर भवन से हुए हादसे में अगर कुछ जिंदगियों पर बन आती है तो उसकी बला से।
अमर उजाला की टीम ने पुराना शहर, सिकलापुर, गुलाबनगर, सुभाषनगर सहित कुछ मोहल्लों में जर्जर मकानों का जायजा लिया तो स्थिति चौंकाने वाली सामने आई। सुभाषनगर में करीब 70 साल पुराना शेर सिंह इमारत की ऊपर की दो मंजिल खाली हो चुकी है। नीचे सात दुकान चल रही है। इस इमारत को लेकर हर साल चर्चा होती है कि ऊपर की मंजिल को हटा कर खतरा कम किया जाए, लेकिन कोई पहल नहीं होने से सुभाषनगर के लोगों में हादसे का डर बना हुआ है।
सिकलापुर में मकानों को जारी हुए थे नोटिस
सिकलापुर में कई जर्जर मकान चिह्नित हो चुके हैं। बावजूद इसके कई जर्जर मकान लोगों को डरा रहे हैं। यहां भी मकानों को नोटिस जारी हो चुका है कि खतरे से बचने के लिए मकान को खाली कर दिया जाए, लेकिन मजबूरन लोग खतरे के बावजूद रह रहे हैं।
पुलिसवाले भी खतरे में रहने को मजबूर
पुरानी पुलिस लाइंस में बने क्वाटर की स्थिति में सुधार नहीं है, छज्जे जर्जर हो चुके है। छतों से बारिश में पानी गिरता है। पुलिस महकमा ने भी इन क्वाटर को सुरक्षित नहीं माना है। इसके लिए बाकायदा बजट जारी करके मरम्मत का काम भी हुआ, लेकिन हालात पहले जैसे बने हुए हैं।
चांद मियां के परिवार को दी मदद
बुधवार रात को बाजदरान मोहल्ले में पतंग बनाने वाले चांद मियां का दो मंजिला खानदानी मकान ढहने से तीन मासूम मलबे में दबे थे। मोहल्ले के लोगों ने एकजुट होकर मलबा हटाकर बच्चों को निकाला और अस्पताल में भर्ती करवाया था। सेवा समिति के सदस्यों के साथ सचिव सुरेश ठाकुर ने परिवार को दस हजार की आर्थिक मदद दी। वहीं कुछ अन्य सामाजिक संगठन भी परिवार से मुलाकात के लिए पहुंचे।
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