मामूली सी कहासुनी के बाद भतीजे को लाठियों से पीट-पीटकर मार देने के आरोपी ताऊ और उसके दो सगे भतीजों को दोषी करार देते हुए अदालत ने बृहस्पतिवार को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। चार साल पहले हुआ यह हत्याकांड जरा सी बात पर काफी नृशंसता से अपने ही रिश्तेदार की हत्या कर दिए जाने के कारण चर्चित हुआ था। अपर सत्र न्यायाधीश सतीश चंद्र द्विवेदी ने तीनों अभियुक्तों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी डाला है। एक अभियुक्त की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी जिसके बाद उसकी फाइल बंद कर दी गई।
क्योलड़िया क्षेत्र के गांव धनौर जागीर निवासी भूपराम ने थाने में 15 जुलाई, 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। भूपरान ने कहा था कि 14 जुलाई को वह अपनी बहन नन्ही देवी के घर केलाडांडी में थे। इसी बीच नन्ही देवी का अपनी जेठानी शकुंतला से किसी बात पर झगड़ा हो गया। इस पर शकुंतला के पति अभय नंदन और उसका भाई वीरपाल हाथों में बांका लेकर बाहर निकल आए थे। अभय नंदन के बेटे रामौतार और गुड्डू भी हाथ में लाठी लेकर आ गए। गालीगलौज करते हुए चारों ने नन्ही देवी के पति नरेंद्रपाल, बेटे सोनू और रमेश पर हमला बोल दिया।
भूपराम ने एफआईआर में बताया था कि हमलावरों ने तीनों को काफी बेरहमी से पीटा। मारपीट में तीनों लोग घायल हुए थे, जिनमें रमेश की हालत ज्यादा गंभीर हो गई थी। मारपीट के दौरान चीखपुकार मचने पर उन्होंने और नन्ही देवी व उनकी बेटी ने हमलावरों को रोकने का प्रयास किया। काफी मान-मनुहार के बाद हमलावर चले गए। इसके बाद भूपराम घायल नरेंद्र, सोनू और रमेश को लेकर थाने पहुंचे, जहां से पुलिस तीनों को जिला अस्पताल ले गई। इलाज के दौरान रमेश जिला अस्पताल में रमेश की मौत हो गई।
इस मामले में चारों लोगों के खिलाफ विवेचना के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 307 के तहत कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। अपर सत्र न्यायाधीश सतीश चंद्र द्विवेदी के समक्ष ट्रायल चला। ट्रायल के दौरान आरोपी अभयनंदन की मौत हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजी फौजदारी रियाजउद्दीन ने जिरह की, वहीं वादी पक्ष से अधिवक्ता अनिल भटनागर ने केस लड़ा। गुरुवार को धारा 302 में तीनों को उम्रकैद और धारा 307 में दस-दस वर्ष की कै द तथा 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।