कुतुबखाना मस्जिद में इमाम को हटाने और नए इमाम की नियुक्ति को लेकर देवबंदी और बरेलवी मसलकों के बीच पिछले साल18 मई को बवाल हो गया था। बाद में मस्जिद में ताला डाल दिया गया। दोनों पक्षों की तकरार बढ़ने पर जिलाधिकारी ने मस्जिद का मामला वक्फ बोर्ड भेज दिया था। करीब एक साल बाद वक्फ बोर्ड ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है। जिलाधिकारी गौरव दयाल के पास फैसले की चिट्ठी शनिवार की रात पहुंच गई। उन्होंने फैसले का पत्र मिलने की पुष्टि की साथ ही कहा कि वक्फ बोर्ड से तस्दीक किया जा रहा है उसके बाद मस्जिद खोलने या न खोलने पर निर्णय लिया जाएगा। कुतुबखाना मस्जिद में 18 मई 2015 से कुछ दिनों पहले तत्कालीन इमाम पर बच्चे के साथ दुर्व्यहार का आरोप लगा था। इसको लेकर जमकर हंगामा हुआ और इमाम को जेल भेज दिया गया जिसकी बाद में जमानत हो गई। अंजुमन इस्लामिया के सचिव हुमायूं रियासत ने नए इमाम की नियुक्ति कर दी। इस नियुक्ति को देवबंद मसलक के लोगों ने स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि पिछले कई सालों से हमारे मदरसों से इमाम की नियुक्ति होती रही तो वहीं से होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्ष आमने सामने आ गए और विवाद इतना बढ़ा की मस्जिद को बंद करना पड़ा। मामला प्रशासन के पास चला गया। प्रशासन ने कई बार सुलह का प्रयास किया। दोनों पक्षों को लेकर कई दौर की वार्ता हुई लेकिन नतीजा नहीं निकला। बाद में जिलाधिकारी ने मामला वक्फ बोर्ड के हवाले कर दिया था।
कुतुबखाना मस्जिद को लेकर आदेश आया है। अभी वक्फ बोर्ड से पुष्टि करनी है। उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा- गौरव दयाल, जिलाधिकारी