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कैंट थाना फूंकने का मामला

Mon, 25 Jan 2016 01:36 AM IST
बरेली
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बरेली। सिपाहियों के दौड़ाने पर जुआ खेल रहे दो युवकों के नदी में डूबकर मरने के बाद थाना कैंट जलाने के आरोप में सटोरिये के बेटे समेत तीन मुल्जिमों का नाम विवेचक कोतवाली के इंस्पेक्टर सुधीर पाल धामा ने बेगुनाह बताकर निकाल ही दिया। इतना ही नहीं उन्होंने नए कप्तान आरके भारद्वाज के तेवर देखकर भाजपा नेता समेत ग्यारह लोगों की गिरफ्तारी के लिए तहरीर थाना कैंट भेज दी है जबकि इस मामले में कार्रवाई लटकी थी।
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दिवाली के दिन कैंट क्षेत्र इलाके में जुआ खेलते समय दो सिपाहियों ने जुआरियों को पकड़ने के लिए दौड़ा लिया। इससे घबराकर भागे तीन युवक नकटिया नदी में कूद गए। इनमें से दो लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन एक ने किसी तरह से जान बचा ली थी। घटना के विरोध में भीड़ ने थाने पर हमला बोलकर परिसर में खड़े वाहनों आग लगा दी थी। घटना के बाद कैंट में कर्फ्यू जैसे हालात हो गए। पुलिस के आला अफसरों ने आसपास के लोगों द्वारा मोबाइल से बनाई गई वीडियो क्लीपिंग और फोटोग्राफरों की मदद से 30 लोगों को चिह्नित कर लिया था। आरोपियों को चिहिन्त करने में कैंट के सीसीटीवी कैमरों की भी मदद ली गई थी। पुलिस ने 11 आरोपी गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। कैंट के सदर बाजार इलाके के रहने वाले सटोरिये के बेटे और भाजपा नेता संजीव कुमार समेत करीब सवा दो सौ लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। विवेचना कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मिलने के बाद मामला पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चला गया। सट्टा किंग के बेटे समेत तीन लोगों की सत्ता के जुड़े लोग भी पैरवी करने लगे। इस पर आला अफसरों ने कह दिया कि जिन लोगों की थाने में हमला करते हुए तस्वीर दिखाई दे रही है, उन्हीं को जेल भेजा जाएगा। सटोरिए ने इसी का फायदा उठाकर अपनी पैरवी कराकर साईन, शाहिद और समीर तीन का नाम निकलवा लिया। इनमें एक सटोरिये का बेटा है। विवेचक का तर्क यह है कि आरोपियों का घटना से कोई लेना-देना नहीं था।

इन लोगों की होगी गिरफ्तारी
-नए कप्तान के कड़े तेवर देखकर विवेचक ने भाजपा नेता संजीव कुमार, अनिल राधे, दीपू, बुग्गे, प्रमोद, रवि, सुरजीत, विनोद उर्फ हड्डी, अज्जू, भुल्लन, चवन्नी उर्फ विजय की गिरफ्तारी के लिए तहरीर कैंट थाने को भेज दी है। यह सभी ऐसे लोग हैं, जिनके पुलिस के पास थाने में हरकत करते फोटो भी हैं।
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कोतवाल पर भारी पड़ गए सटोरिए
-कैंट कोतवाल ने थाना फूंकने से कुछ दिन पहले ही सटोरियों को बंद कर दिया था। इसे लेकर सटोरियों का उनसे मनमुटाव चल रहा था। इसी बीच थाना फूंकने की घटना होने पर उनके नाम मुकदमे में आ गए। सटोरियों ने सट्टा का काम करने की बात स्वीकार करते हुए यह भी बता दिया कि इन दिनों इंस्पेक्टर से विवाद होने के बाद काम नहीं कर रहे हैं। पुलिस ने खुन्नस में हमारा नाम लिखवा दिया है। हमारेफोटो थाना फूंकने में दिखाई दें तो जेल भिजवा दो। कैंट पुलिस की और भी वसूली की शिकायतें आ रही थीं। इसके बाद ही विवेचना कैंट के हटाकर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक को दी गई। इसी का सटोरिये को फायदा मिल गया। उनसे पैरवी कराकर अपने बेटे का नाम निकलवा लिया।
 
-विवेचना के दौरान उनकी नामजदगी झूठी पाए जाने पर आला अफसरों के निर्देश पर तीन नाम निकाले गए हैं। उनके खिलाफ थाना फूंकने के मामले में कोई सुबूत नहीं मिले। सीसीटीवी फुटेज और फोटो में इनमें से कोई नजर नहीं आ रहा है-सुधीर पाल धामा, विवेचक इंस्पेक्टर, कोतवाली
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