नाइजीरियन ठगों के गैंग में धंतिया गांव के तांत्रिक समेत तेरह लोगों के नाम पुलिस ने खोल दिए हैं। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई गांव में ताबड़तोड़ दबिश दी, लेकिन कोई मुल्जिम हाथ नहीं लगा है। फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले आरटीओ ऑफिस के बाहर दलाली करने वाले तीन व्यक्ति भी फरार हैं। उनकी तलाश में भी पुलिस दबिश दे रही है, लेकिन अभी कोई कामयाबी नहीं मिल पाई है।
धंतिया गांव के मुजाहिद और रिजवान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस नाइजीरियन ठगों के गैंग से पर्दा उठाने के लिए लगी हुई है। मुजाहिद का तो पूरा खानदान ही ठगों के गैंग में शामिल हैं। विवेचक उपेंद्र सिंह ने मुजाहिद के भाई आसिफ का नाम खोल दिया है। वह दिल्ली में रहकर नाइजीरियन ठगों के लिए गुर्गों की टीम बना रहा है। उसके भाई सद्दाम, हैदर भी फर्जी नामों के खाते खोलकर कमाई करने में लगे हैं। इनके नाम भी गैंग में शामिल कर लिया गया है। फर्जी आईडी बनवाने को काम करने वाला कालीबाड़ी के युवक नरेंद्र राणा भी बड़ा खिलाड़ी है। पुलिस ने नरेंद्र का नाम भी खोल दिया है। थाना बारादरी के सुरेश शर्मा नगर में रहने वाले आरटीओ के दलाल अशोक कु मार, फरीदपुर में रहने वाले अनिल कुमार और शहर के ही दयाशंकर साहू फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते हैं। विवेचक ने इन तीनों के नाम भी मुकदमे में खोल दिए हैं। नए नामों में धंतिया गांव के जमशेद अली, हैदर और फरमान के अलावा वहीद खां के परिवार के सदस्य का नाम आया है। ट्यूलिया गांव के दो युवकों के नाम भी गैंग में शामिल हुए हैं। सोमवार को इज्जतनगर पुलिस ने धंतिया और ट्यूलिया गांव में आरोपियों के घर दबिश दी। एसपी सिटी समीर सौरभ ने बताया कि ठगों के गैंग का खुलासा करने के लिए टीमें लगी हुई हैं। जितने लोगों के नाम सामने आएंगे, उन सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
सदाकत भी गांव के गायब हो गए
बरेली। परतापुर चौधरी गांव के सदाकत और उसके साथियों की भी पुलिस तलाश कर रही है। किस तरह से उन्होंने करोड़ों की संपत्ति बना ली है, इसके बारे में भी जांच होनी है। हवाला के मामले में सदाकत पहले भी जेल जा चुका है।