Including the father-son three uncontrollable truck was thrashed to death
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
शादी समारोह में दावत खाने के बाद घर लौट रहे बाइक सवारतीन लोगों को एक ट्रक ने रौंद दिया। इसमें गंभीर चोटें आने से तीनों की मौके पर मौत हो गई। मरने वालोें में दो-पिता पुत्र थे, जो उत्तराखंड के किच्छा निवासी थे।
बिहार के बक्सर जिले के मूल निवासी करीब 35 वर्षीय सतेंद्र साहू पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड के किच्छा की आवास विकास उत्तरांचल कालोनी में परिवार समेत रह रहे थे। वहां वह आदित्य चौक के निकट इंट्रास फैक्ट्री में काम करते थे। उनका बेटा चौैदह वर्षीय सुजीत सिंह हाईस्कूल में पढ़ता था। उसी फैक्ट्री में काम करने वाले व सतेंद्र के दोस्त के साले की बहेड़ी में शादी थी। विवाह समारोह में सतेंद्र सिंह, उनका बेटा सुजीत सिंह और पड़ोस में रहने वाला दोस्त 30 वर्षीय रामप्रवेश भी शामिल हुए थे। दावत खाने के बाद वहां से रात में करीब दो बजे तीनों लोग बाइक पर अपने घर किच्छा लौट रहे थे। बाइक सतेंद्र चला रहे थे। भाई उपेंद्र सिंह ने बताया कि बरेली-नैनीताल हाइवे पर बहेड़ी थाना क्षेत्र में खालासा ढाबा के पास बाइक रोककर सतेंद्र और रामप्रवेश बातें करने लगे। सुजीत भी वहीं खड़ा था। तभी तेजी से आए ट्रक ने तीनों को रौंद दिया। इसमें गंभीर चोटें आने से सतेंद्र, उनके बेटे सुजीत व दोस्त राम प्रवेश ने मौके पर दम तोड़ दिया। इस हादसे की सूचना मिलने पर बहेड़ी पुलिस मौके पर पहुंच गई। मंगलवार को तीनों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। सूचना मिलने पर पहुंचे परिवार वाले शव लेकर लौट गए।
शव पहुंचे तो मचा कोहराम
किच्छा। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद तीनों के शव घर ले जाए गए तो कोहराम मच गया। राम प्रवेश मूल रूप से गोरखपुर का रहने वाला था। घर में उसकी पत्नी अनीता व तीन बेटियां अन्नू, मुस्कान व विशाखा हैं। पांच साल रहले रामप्रवेश ने नदी पार थोड़ी सी जमीन खरीदकर अपना घर बनाया था। हादसा का पता लगने पर उसकी पत्नी और बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इधर, आवास विकास कालोनी में किराए पर रहने वाला सतेंद्र अपने एक साथी की बाइक मांगकर ले गया था। उसके दो बेटियां और एक बेटा हैं। बड़ा बेटा सुजीत हादसे का शिकार हो गया।
सुजीत को खींच ले गई मौत
बरेली। परिजनों के मुताबिक दावत में सतेंद्र व रामप्रवेश जाने को थे। मगर सतेंद्र के घर से निकलते समय सुजीत भी साथ जाने की जिद करने लगा। माता-पिता ने काफी देर समझाया, लेकिन वह नहीं माना। आखिर में सुजीत को साथ ले गए। घरवालों का कहना है कि सुजीत को मौत खींच ले गई। पिता-पुत्र की मौत से पूरा परिवार उजड़ गया। सतेंद्र नौकरी करके परिवार का गुजारा करता था। अब बड़ा सवाल है कि उसकी पत्नी तीन बच्चों और खुद का पेट कैसे भरेगी?