पुलिस विभाग में कार्यरत पत्नी की मौत के बाद बच्चों को मृत दिखाकर ग्रेजुएटी फंड का रुपया हड़पने के आरोपी बर्खास्त सिपाही की पैरवी लेकर आईजी एसके भगत के सामने जाना उसके भाई को भारी पड़ गया। आईजी ने कोतवाली पुलिस को बुलाकर दोनों को पकड़ लेने के निर्देश दिए, साथ ही बर्खास्त सिपाही के भाई की भी ठगी में भूमिका जांचने के लिए कहा है।
पुलिस महकमा में सिपाही योगेंद्र कुमार शर्मा की पत्नी से अनबन होने के बाद उनके प्रेम संबंध दूसरी महिला कृष्णा शर्मा से हो गये। यह कृष्णा भी पुलिस विभाग में कार्यरत थी। उसके दो बच्चे थे। बाद में योगेंद्र पहली पत्नी के पास लौट गए थे। योगेंद्र पर आरोप है कि कृष्णा की मौत के बाद उन्होंने उसके दो बच्चों को मृत दिखाकर ग्रेजुएटी और फंड का रुपया हथिया लिया था। बाद में महिला पुलिसकर्मी की बेटी शिवांगी की शिकायत पर योगेंद्र कुमार को बर्खास्त कर दिया गया। उसकी शिकायत के बाद योगेंद्र पर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करके उसको जेल भेज दिया गया। मंगलवार को योगेंद्र के भाई छोटेलाल अपने दोस्त रमेश के साथ आईजी एसके भगत के कार्यालय पहुंचे। उनके पास एक डॉक्टर का सर्टिफिकेट था, जिसको दिखाकर उन्होंने बताया कि उनके भाई योगेंद्र की हालत जेल में ठीक नहीं है। वह उससे मिलने और रियायत की मांग कर रहे थे। आईजी ने सख्त से पूछा तो उन्होंने स्वीकारा कि वह वकील के कहने पर कार्यालय आ गए थे। इसके बाद आईजी ने कोतवाली पुलिस बुलाकर दोनों को उनके हवाले कर दिया। आईजी ने निर्देश दिया कि जांच लिया जाए कि योगेंद्र द्वारा हुई ठगी में उनके भाई की भूमिका क्या है। कोतवाली पुलिस ने दोनों को कोतवाली में ही बैठा लिया है।