दिल्ली-एनसीआर में गणतंत्र दिवस और विधान सभा चुनाव से पहले कारतूसों के जखीरे के साथ पकड़े गए फहीम मियां उर्फ बंटी को उसके अस्थायी पते के आधार पर घोड़ाकाल उत्तराखंड का बताया गया है जबकि वह बरेली के मीरगंज का है और जिले का क्लास वन हिस्ट्रीशीटर है। पहली बार पुराना शहर में दुष्कर्म के प्रयास में पकड़ा गया बंटी एक बार अपराध की दुनिया में उतरा तो फिर इसी दलदल में धंसता चला गया। उस पर बरेली में ही हत्या, लूट, डकैती, जानलेवा हमला, रंगदारी और मादक पदार्थ की तस्करी समेत करीब दो दर्जन मामले दर्ज हुए। आखिरकार वह भागकर उत्तराखंड चला गया वहां भी उस पर कई आपराधिक मामले दर्ज हुए ।
मूलरूप से थाना मीरगंज (बरेली) के गांव हल्दी खुर्द का फहीम उर्फ बंटी किला के मोहल्ला कंघी टोला में रहता था। पुराना शहर में उसने वर्ष 1996 में एक बालक से कुकर्म का प्रयास किया। 1997 में फहीम ने किला थाने में भी दो दफा जानलेवा हमले की वारदात की। 1998 में बारादरी थाने में ही उस पर जानलेवा हमला, डकैती, आर्म्स एक्ट, रंगदारी, मादक पदार्थ तस्करी, अमानत में खयानत कर जान से मारने की धमकी देना, चोरी और माल बरामदगी, 1999 में घर में घुसकर जान लेवा हमला कर हत्या करना, वर्ष 1999 में जान से मारने की धमकी देते हुए जानलेवा हमला करने आदि के मुकदमे दर्ज हुए। 2000 में मादक पदार्थ तस्करी और 2001 में किला थाने से लूट के माल के साथ और रंगदारी के मामले में उसे जेल भेजा गया। वर्ष 2001 में ही कोतवाली क्षेत्र में उस पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा। 2004 में किला में फिर उसने एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला किया। पुलिस का दबाव पड़ने पर वह बरेली छोड़कर हल्द्वानी (उत्तराखंड ) चला गया। वहां भी उसका अपराध से नाता नहीं छूटा। 15 अप्रैल 2014 को भवाली (नैनीताल) पुलिस ने उसे चोरी की योजना बनाने के आरोप में जेल भेजा था। बरेली के बारादरी, कोतवाली और किला में 23 मुकदमों के अलावा उस पर उत्तराखंड में भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। उत्तराखंड में रहते हुए वह दिल्ली में भी पैर पसार रहा था लेकिन कारतूस सप्लाई में पकड़ा गया। सूत्र बताते हैं कि एक पार्टी के सुप्रीमो की दिल्ली में स्थित कोठी के कर्ताधर्ता से उसका गहरा संपर्क है।