बेरोजगारी ने एक ड्राइवर की जान ले ली। लगातार काम न मिलने से अवसाद में आए ड्राइवर ने अपने ही घर में फांसी लगा ली। सुसाइड नोट में उसने अपनी मौत के लिए किसी को दोष नहीं दिया है। परिवार वालों के कहने पर पुलिस ने पंचायतनामा भरकर शव उनके हवाले कर दिया।
एफसीआई के रिटायर चतुर्थ श्रेणी कर्मी दयाशंकर किला क्षेत्र के गढ़ी रफियाबाद में पुश्तैनी घर में परिवार के साथ रहते हैं। बड़ा बेटा राजेंद्र उर्फ राजन (35) पत्नी शीतल और तीन बच्चों के साथ छत पर बने कमरे में रहता था। राजन कभी किराये का ऑटो तो कभी बुकिंग पर कार चलाकर परिवार पालता था। शुक्रवार दोपहर दो बजे वह अपने कमरे में था। पत्नी पड़ोस में गई थी और बच्चे नीचे खेल रहे थे। शाम चार बजे पत्नी कमरे में पहुंची तो राजन का शव रस्सी के सहारे पंखे से लटका देख चीख पड़ी। सूचना पर गढ़ी चौकी प्रभारी मनोज मिश्रा पहुंचे। मौके पर सुसाइड नोट मिला। इसमें लिखा था कि पत्नी और परिवार के सभी लोग उसे प्यार करते हैं। उसे इनमें से किसी से कोई शिकायत नहीं है। वह खुद अपनी जान दे रहा है। पिता दयाशंकर ने बताया कि राजन न तो किसी ऐब में था और न ही उस पर किसी का कर्ज था। वह बेरोजगारी से परेशान था। महीने में एकाध बार ही उसे काम मिल पाता था जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करने में दिक्कत आ रही थी।