लाटरी पर प्रतिबंध लगने के बाद अब नगर में सट्टेबाजी जमकर पनप रही है और सट्टे का कारोबार दिन प्रतिदन बढ़ता जा रहा है। आलम ये है कि नगर की भीतरी बस्तियों में कई अड्डों पर कुछ लोग खुल्लमखुल्ला सट्टा खिलवा रहे है इनमें से कई शातिर अपने कारोबार की आड़ में सट्टे का धंधा चला रहे हैं। सट्टे के इस धंधे को पुलिस का भी संरक्षण प्राप्त है और पुलिस के कुछ गुर्गे इन सटोरियों से महीना वसूल कर पहुँचाने का काम करते हैं। सट्टे का कारोबार कुछ निश्चित अड्डों पर सुबह से देर शाम तक चलता है और दिन में चार बार खुलने वाले सट्टे पर आजकल कई-कई लाख का सट्टा रोजाना लग रहा है । जानकारों के अनुसार सायं 4 पर फरीदाबाद ,सायं 6 पर गाजियाबाद व रात्रि 11 पर गली नाम का सट्टा खुलता है और आखिरी सट्टा दिसाबर दिन निकलने से पूर्व सुबह 4 बजे खुल जाता है और परिणाम आने के तुरंत बाद ही सटोरिये ईमानदारी से तुरन्त ही इसका भुगतान भी कर देते हैं।
एक के अस्सी मिलने के लालच में मजदूर तबका शिकार
सट्टे के इस खेल में डबल जीरो से 99 तक के अंक लगाए जाते हैं अंदर-बाहर का एक अंक लगाने को हरूफ बोलते हैं और हरूफ के आने पर एक के 9 तो दोनो अंक फंसने पर 1 के 80 मिलते हैं और रातों-रात लखपति बनने के लालच में गरीब व मजदूर तबका ही इसका शिकार हो रहा है। कभी पर्चियों से खेला जाने वाला सट्टे का ये खेल अब सीधे मोबाइल पर ही खेला जाता है और सट्टा खिलाने वाले के मोबाइल पर ही इसका परिणाम आ जाता है । बाईपास चौराहा, चौपुला, मोती मस्जिद रोड, अस्पताल गौंटिया, फारूक की पुलिया, कमेला रोड व नीमगढ़-गंगामन्दिर सहित कई स्थलों पर सट्टाबाजों ने अपने अड्डे बना रखे हैं और चावल ,कपड़ा व किराने और होटल की आड़ में ये धंधा चला रहे हैं जो पुलिस के भी संज्ञान में हैं और इन सटोरियों से महीना उगाहने के लिए पुलिस के कुछ एजेंट ही सक्रिय हैं जो महीना वसूल कर पुलिस तक पहुँचाते हैं।