नेताजी नोटबंदी से तो बच गए लेकिन विधानसभा चुनाव लड़ने के दौरान नामांकन के साथ दाखिल किए गए शपथपत्र में फंस सकते हैं। बरेली के ऐसे 35 नेताओं की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जन्मकुंडली निकाल ली है। उनके शपथपत्रों में शामिल किए गए खुद, पत्नी और बच्चों के संपत्ति के ब्योरे की पड़ताल शुरू कर दी है। उनके खातों से एक साल के दौरान हुए लेन देन की आयकर की प्रवर्तन निदेशालय टीम बैंकों से गोपनीय तरीके से जानकारी जुटा रही है।
रिटर्निंग आफीसरों ने चुनाव आयोग की वेबसाइट पर प्रत्याशियों के शपथपत्र डाले थे। प्रवर्तन निदेशालय ने बरेली के 96 प्रत्याशियों में से 35 के खातों को जांच के लिए निकाल लिया है। उनमें आय से अधिक संपत्ति के मामले खुलने की संभावना तलाशी जा रही है। अब तक की पड़ताल में संकेत मिले हैं कि कुछ खातों में तीन महीने पहले अधिक धनराशि थी लेकिन अब निकालकर दूसरे खातों में हस्तांतरित करा दी गई है। या फिर किसी के नाम चेक देकर निकाल लिया है। इस पड़ताल में वह लोग भी शामिल हो गए हैं, जिनके खातों में कई लाख रूपये ई ट्रांजेक्शन या फिर चेक के माध्यम से हस्तांतरित हुए हैं।
कई प्रत्याशियों ने तो शपथपत्र में बैंक का नाम दिया है लेकिन खाता नंबर नहीं दिया है। कई के खाते नंबर अंकित हैं लेकिन उनके खाता नंबर गलत है। यानी कि जिस नंबर को शपथपत्र में लिखा है वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम का है। उनके बारे में यह टीम अपने स्तर से जानकारी जुटा रही है। साथ ही पेन नंबर के आधार पर पर उनके स्तर से दो या तीन साल के दौरान किए गए आर्थिक लेनदेन की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
बचत खाते चालू खाते में तब्दील
चुनाव आयोग के निर्देश पर सभी 96 प्रत्याशियों के नाम से खुले बचत खाते चालू खातों में तब्दील हो गए हैं। इन बचत खातों को तब्दील कराने के बारे में चुनाव आयोग ने रिजर्व बैंक और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए थे। उसी निर्देश पर आज सभी प्रत्याशियों को डीएम ने निर्देश दिए और कहा कि वह अपने इन खातों को चालू खातों को तब्दील करा लें।