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पेपर खराब होने से हताश हुई छात्रा ने दे दी जान

Sat, 22 Apr 2017 01:08 AM IST
बरेली।  
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Due to bad paper, the schoolgirl gave up hope - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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इंटरमीडिएट परीक्षा में पेपर खराब होने से छात्रा इतनी हताश हुई कि उसने बृहस्पतिवार रात फांसी के फंदे पर लटककर जान दे दी। घर में कोहराम मचा हुआ है। पोस्टमार्टम हाउस पर परिजन रोते हुए यही कहे जा रहे थे कि कम नंबर आ जाते तो भी क्या था अब तुम तो न आओगी। 
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भोजीपुरा क्षेत्र के गांव अटापट्टी जनूबी निवासी किसान फूल चंद की 18 वर्षीय बेटी संतोषी कुमारी आदर्श निकेतन इंटर कॉलेज आटामांडा में इंटरमीडिएट में पढ़ती थी। यूपी बोर्ड परीक्षा में उसका परीक्षा केंद्र पटेल इंटर कॉलेज था। जिसमें छात्रा ने इंटरमीडिएट के पेपर दिए। पेपर शुरू से ही ठीक नहीं गए तो वह तनाव में रहने लगी। बृहस्पतिवार को संस्कृत का आखिरी पेपर था, वह भी बेहद खराब गया। इससे वह और तनाव में आ गई। बृहस्पतिवार को पेपर देकर लौटने के बाद उसने खाना भी नहीं खाया। शाम को भी थोड़ा सा ही खाना खाया और अपनी मां किशोरी देवी के पास आंगन में चारपाई पर सो गई। इसके बाद आधी रात के बाद किसी समय किशोरी मां के पास से उठकर किचन में पहुंची और पंखे के कुंडे में रस्सी का फंदा बांधकर उस पर लटककर जान दे दी। रात ढाई बजे जब भाई अहबरन सिंह की नींद टूटी तो उसने संतोषी को मां की चारपाई से गायब देखा। इस पर उसकी कमरे आदि में तलाश की गई तो उसका शव किचन में फंदे पर लटका मिला। यह देख परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर इंस्पेक्टर भोजीपुरा हरेंद्र सिंह तोमर पुलिस के साथ पहुंच गए और छात्रा के शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। यहां भाई अहबरन सिंह ने बताया कि संतोषी पेपर खराब होने से बेहद तनाव में रहती थी। बृहस्पतिवार को संस्कृत का पेपर ज्यादा खराब होने से संतोषी ने स्कूल से लौटने के बाद कुछ नहीं खाया। शाम को भी न के बराबर ही खाया। इसके बाद रात में उसने खुदकुशी कर ली। 

गुस्से की तेज थी संतोषी
पुलिस की छानबीन में पता चला कि संतोषी पढ़ाई में भले ही कमजोर थी, लेकिन गुस्से की बहुत तेज थी। पेपर ठीक न होने पर उसे बेहद गुस्सा आया और और उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
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परीक्षा का खराब होना ही एक कारण कहना मुश्किल: मनोवैज्ञानिक 
बरेली कॉलेज की मनोवैज्ञानिक डॉ. हेमा खन्ना का कहना है कि किशोरी का आत्महत्या करने का कारण परीक्षा का खराब होना हो यह कहना सही नहीं होगा। कुछ और भी समस्या हो सकती है जो बच्ची किसी को बता न रही हो या बताना न चाह रही हो। इस तरह के कई केस हमारे सामने आते हैं जिसमें मनोस्थिति अन्य की सोच से काफी अलग होती है। डॉ. खन्ना ने बताया कि यह उम्र ऐसी है कि इसमें बच्ची इतनी सोच समझ रखते हैं कि अगर एक पेपर खराब हो गया है तो क्या हुआ बाकी अच्छे गए हैं या फिर सभी पेपर खराब हैं तो अगले साल तैयारी करके पास कर लेंगे। दूसरी बात यह हो सकती है कि बच्ची की आकांक्षाएं बड़ी हो और वह उसमें फेल साबित हो गई हो या फिर उसके साथ पहले कभी पढ़ाई को लेकर घर का माहौल खराब हुआ हो। माता पिता से बात करने पर ही असली बात पता चल सकती है। 
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