थाना इज्जतनगर के मुड़िया अहमद नगर गांव के मोहम्मद फहीम की पत्नी खुशनुमा के बहनोई ने फर्जी तलाकनामा तैयार कराकर उन्हें अलग करने की कोशिशें की, लेकिन वह एक -दूसरे से अगल होने को तैयार नहीं हुए। खुशनुमा पति का जिंदगी भर साथ निभाने का वादा करके उसके साथ फिर ससुराल चली गई। कुछ दिन पहले दोनों में झगड़ा हुआ तो खुशनुमा मायके में आकर रहने लगी थी।
15 दिसंबर को खुशनुमा ने एसएसपी को शिकायती पत्र देकर बताया कि 21 अक्तूबर 2013 को उसकी शादी मुड़िया अहमद नगर के मोहम्मद फहीम के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद पति से उनकी गलतफहमियां हो गईं। इसकी वजह से घर में आए दिन झगड़ा होने लगा। इस दौरान वह अपने मायके चली गई थी। थाना बहेड़ी के ग्राम खमड़िया के रहने वाले उनके बहनोई इब्राहीम घर जमाई हैं। इब्राहीम ने उसे उसके पति और सुसराल वालों के खिलाफ भड़काने लगे। खुशनुमा के मुताबिक उसके पति और ससुराल वालों को इब्राहीम ने तलाक लेकर फैसला न करने पर दहेज के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। वह अपने पति से तलाक नहीं चाहती है। इतना ही नहीं इब्राहीम ने फहीम और खुशनुमा को पांच अगस्त को कचहरी बुलाकर तलाक नामा तैयार कराकर उस पर हस्ताक्षर भी करा लिए। फहीम ने तीन तलाक बोला ही नहीं, जबकि तलाक नामा में तलाक देने की बात लिखवा दी गई। एसएसपी ने यह मामला पुलिस परामर्श केंद्र भेज दिया। काउंसलर खलील कादरी ने दोनों पक्षों को बुलाकर बात सुनी तो खुशनुमा की बात सच निकली। बहनोई को बुलाकर दंपति के सामने बैठाकर बात की गई तो जवाब नहीं दे पाए। उनकी बोलती बंद हो गई। काउंसलर ने फर्जी तलाकनामा तैयार कराने के आरोप में जेल भिजवाने को कहा तो बहनोई सकपका गया। कहने लगे उसने कुछ नहीं किया। वह दंपति के बीच में कभी नहीं बोलेगा, खुशनुमा अपने पति के साथ रहे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद खुशनुमा पति के साथ ससुराल चली गई। नए साल में काउंसलर ने फिर ने तलाकनामा के गवाहों को साथ बुलाया है। तलाकनामा पर खुशनुमा के बहनोई के अलावा सद्दीक अहमद के हस्ताक्षर हैं।
इस तरह तैयार हुआ फर्जी तलाकनामा
-तलाकनामा फहीम की तरफ से तैयार कराया गया। पहला पक्ष होने के नाते उसकी तरफ से लिखा गया कि उसकी शादी 21 अक्तूबर 2013 को खुशनुमा से हुई है।
-हमारे बीच कुछ मतभेद हो गया है। इसलिए दोनों ने सहमति के आधार पर तलाक का फैसला लिया है।
-खुशनुमा के परिवार वालों ने दहेज में जो सामान दिया, वह वापस कर दिया है।
-दोनों के बीच मतभेद होने पर फहीम ने 5 अगस्त को गवाहों के सामने खुदा को हाजिर नाजिर मनाकर तीन बार तलाक कह दिया। जिसे खुशनुमा के कुबूल भी कर लिया।
-तलाक होने के बाद दोनों अलग-अलग रहने और अपनी इच्छानुसार निकाह करने के लिए आजाद हैं।
-अब दोनों पक्षों के बीच कोई संबंध नहीं रह गया। कोई भी पक्ष किसी के खिलाफ मुकदमा नहीं करेगा।
मुझे पति ने कभी तलाक नहीं दिया, बहनोई ने जबरन कागज पर अंगूठा लगवा दिया। मुझे नहीं पता उसमें क्या लिखा था। उसे पति फहीम के साथ रहना है। अब कोई शिकायत भी नहीं है- खुशनुमा
पति पत्नी में मामूली विवाद तो हो ही जाता है। इब्राहीम नहीं चाहते कि हम दोनों साथ रहें। उन्होंने धमकाकर उससे तलाकनामा पर हस्ताक्षर कराए हैं-फहीम
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मुझे खुशनुमा और फहीम के साथ रहने में कोई परेशानी नहीं है। इन लोगों के कहने पर ही उसने तलाकनामा तैयार कराया था। अब मुझे बिना वजह फंसा रहे हैं- इब्राहीम