जमीन से कब्जा छुड़ाने में भी नगर निगम प्रशासन अपनी मनमानी करने से नहीं चूका। बृहस्पतिवार को धर्मदत्त सिटी अस्पताल का कब्जा छुड़ाने गए मेयर और नगर आयुक्त ने राजकीय आयुर्वेद अस्पताल को पहले खाली करा दिया। स्टोर का ताला तोड़कर सामान बाहर कर दिया और अपना ताला डलवा दिया। कार्रवाई इतनी तेज हुई कि अस्पताल के नाम को हटाकर वहां नगर निगम जोनल कार्यालय का नाम भी पेंट कर दिया गया। बिना नोटिस के हुई इस बड़ी कार्रवाई से नाराज इस सरकारी चिकित्सालय के डाक्टरों ने लखनऊ में उच्च अधिकारियों और शाम को डीएम से मिलकर घटना की पूरी जानकारी दी। शाम प्रेमनगर थाने में निगम प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंच गए। हालांकि बाद में डीएम के हस्तक्षेप पर डॉक्टर वापस लौट गए।
धर्मदत्त ट्रस्ट को यह जमीन नगर निगम ने दी थी। बाद में ट्रस्ट ने यह जमीन शासन को दान में दी दी जहां धर्मदत्त राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल भी है। जमीन का मुकदमा नगर निगम के पक्ष में हुआ है जिसे खाली कराने नगर निगम की टीम गुरुवार को करीब 12 बजे पहुंची। अस्पताल की दवाएं, कुर्सी, मेज, दस्तावेज सब बाहर निकालकर बाहर कर दिए। जबकि दूसरी तरफ अधीक्षण अभियंता कार्यालय लघु सिंचाई, बाल विकास परियोजना अधिकारी, उपनिदेशक उप्र राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्थान को खाली कराने के लिए 15 दिन की मोहलत देकर चले आए। इससे बड़ी दरियादिली धर्मदत्त सिटी अस्पताल पर दिखाई। यहां डॉक्टरों को एक माह का मौका खाली करने को दे दिया। राजकीय अस्पताल को नोटिस भी नहीं दिया गया था।
- ताला तोड़ने की रिकार्डिंग की तो मिली धमकी
नगर निगम की टीम आयुर्वेद अस्पताल के स्टोर का ताला तोड़ रही थी। वहां मौजूद डॉ. संजीव वीडियो रिकार्डिंग करने लगे। इस पर नगर आयुक्त ने वीडियो डिलीट करा दी और कोर्ट में ले जाने की धमकी दी।
- शुक्रवार को डीएम और नगर आयुक्त अस्पताल खोलेंगे
देर शाम डॉ. रश्मि बाला, संजीव मिश्रा, अभिषेक और होम्योपैथिक चिकित्सक डा. पुनीत सरपाल प्रेमनगर थाने में निगम प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे थे। लेकिन देर शाम डीएम की ओर से अस्पताल के दोबारा गठन की बात डॉक्टराें को बताई गई। इस पर डॉक्टर वापस चले आए। डॉ. रश्मि बाला ने बताया कि डीएम और नगर आयुक्त शुक्रवार को अस्पताल में आएंगे।
- यह है मसला
नगर निगम की ओर से वर्ष 1949 व 1952 में अपने भूखंड संख्या 82- 85 और 86- 89 के खाली क्षेत्र पर अस्पताल संचालन के लिए धर्मदत्त सिटी अस्पताल ट्रस्ट को लीज पर दी गई थी। जानकारी के मुताबिक धर्मदत्त ट्रस्ट की ओर से शासन को 60 साल पहले जमीन का कुछ हिस्सा दान में दे दिया गया। इस पर राजकीय आयुर्वेद अस्पताल बना। इस पर कोर्ट द्वारा अधिकार का फैसला निगम के पक्ष में आने के बाद निगम सख्त हुआ। गुरुवार को वे धर्मदत्त सिटी अस्पताल की जमीन खाली कराने पहुंचे थे। आयुर्वेद की जमीन भी निगम के दायरे में आई, इसलिए वे इसे भी खाली कराने पहुंच गए।
- वर्जन--
मैने नगर आयुक्त से बात कर ली है। कल राजकीय आयुर्वेद अस्पताल पुन: स्थापित होगा एवं लीज के कानूनी पहलुआें पर कार्य किया जाएगा ताकि अस्पताल चलता रहे।
पंकज यादव, डीएम
जमीन धर्मदत्त सिटी अस्पताल को लीज पर दी थी, उन्हाेंने जमीन डोनेशन में शासन को दे दी। इस नाते नोटिस धर्मदत्त सिटी को भेजा गया था। उन्होंने एक माह की मोहलत मांगी तो हमने दे दी, आयुर्वेद अस्पताल के स्टॉफ ने सामान रखने की मोहलत मांगी तो तीन दिन दिया गया।
डॉ. आईएस तोमर, मेयर