मोहम्मद सिद्दीक
बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के प्रधान वैज्ञानिक दीपक शर्मा की हत्या का खुलासा छह माह बाद भी न होने से शासन तक खलबली है। एडीजी और आईजी क्राइम ने इस केस पर गुरुवार को चार घंटे तक मंथन किया और नया प्लान समझाया। एक महिला से दीपक शर्मा के नजदीकी रिश्ते को अहम कड़ी माना गया और इस कड़ी को सुलझाने के लिए किसी असलम नाम के व्यक्ति की तलाश की जा रही है। ऊपर के निर्देश पर अब सीओ तृतीय डीएस मार्छाल ने चार टीमें बनाई हैं और सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी है।
आईवीआरआई कैंपस में बने बंगले में ही 29 जुलाई 2015 को प्रधान वैज्ञानिक दीपक शर्मा का बेरहमी से कत्ल करने के बाद हत्यारे फरार हो गए थे। पुलिस के अलावा एसटीएफ को भी आईजी ने लगा दिया था, लेकिन अभी तक घटना नहीं खुल पाई। इसे संज्ञान में लेते हुए प्रदेश के एडीजी क्राइम और आईजी क्राइम ने खुलासे को अब तक की गई तफ्तीश की बृहस्पतिवार को लखनऊ में समीक्षा की जिसमें सीओ और एसओ को बुलाया गया था। विवेचना का सबसे अहम पहलू वैज्ञानिक के किसी महिला से नजदीकी रिश्तों को माना जा रहा है। कहा गया कि कोई खास व्यक्ति ही रहा होगा, जिसने घर पहुंचने पर वैज्ञानिक से हाथ मिलाया होगा। किसी असलम नाम के व्यक्ति को टारगेट किया गया है जिससे कुछ तार हत्याकांड के जुडे़ हो सकते हैं। माना जा रहा है कि हाथ मिलाने वाला असलम हो सकता है जिसे महिला का नजदीकी भी माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो काल डिटेल में यह नाम सामने आया है।
टीम एक
सदस्य: एसओ इज्जत नगर सतेंद्र सिंह, एसआई आशीष कुमार, अमर सिंह और रोहित कुमार
काम: प्रधान वैज्ञानिक के किस महिला से नजदीकी रिश्ते थे। उस रात ऐसा कौन सा शख्स था, जो बेझिझक होकर प्रधान वैज्ञानिक के पास आया और हाथ तक मिलाया। असलम नाम का व्यक्ति कौन है और उसके वैज्ञानिक से क्या ताल्लुकात थे। आखिरी बार वैज्ञानिक को किसने फोन किया था और अन्य किन किन लोगों से बातचीत हुई।
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टीम- दो
सदस्य: एसएसआई नरेश कुमार, सिपाही सरकार अली, अनुपम कुमार
काम: प्रधान वैज्ञानिक का आफिस शाम के समय किस नौकर ने बंद किया था और घर तक उनके साथ कौन आया था। दिनभर में कितने वाहन उनके आफिस और घर के सामने ठहरे थे। उनके नंबरों के आधार पर पता लगाया जाएगा।
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टीम- तीन
सदस्य: एसआई प्रवीन कुमार, सिपाही नरेंद्र यादव, सर्वेश कुमार
काम: वर्ष 2013 में हुए घपले के बिल कौन पास कराना चाहता था। इसको लेकर कितने दिनों तक विवाद चला। यह मामला किस तरह से निपटा। इन्हीं सब बिन्दुओं पर पड़ताल करनी होगी।
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टीम- चार
सदस्य दरोगा गजेंद्र के साथ सिपाही तेजपाल, उग्रवीर सिंह
काम: विवेचना में जिस तरह के तथ्य सामने आएंगे। तीनों टीमों के सहयोग के लिए गैर जनपद और गैर प्रांत जाने को यह टीम तैयार रहेगी। आईवीआरआई कैंपस में भी यह टीम लगातार निगाह बनाए रखेगी।
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एडीजी क्राइम और आईजी क्राइम ने चार घंटे तक अब तक की पड़ताल में आए तथ्यों की समीक्षा की। वर्ष 2013 में घपले के बिल पास न करने के पहलू को अहम नहीं पाया गया। प्रधान वैज्ञानिक के किस महिला से नजदीकी रिश्ते थे, इस लाइन को ठोस बताया गया और इस पर काम करने के निर्देश दिए गए। साथ ही असलम नाम के व्यक्ति का भी पता लगाने को कहा गया। इसके लिए चार टीमें बनाकर उनको उनके कार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
- डीएस मार्छाल, सीओ सिटी तृतीय