भैया-भैया कहकर जिसके साथ खेला करता था उसी हैवान ने मासूम की गला रेतकर हत्या कर दी। शाही के बीथम नौगवां गांव में हुई इस सनसीखेज वारदात से सभी सन्न हैं। हत्या के पीछे मासूम के परिजन तो एक साल पुरानी नोकझोंक बता रहे हैं लेकिन घटनास्थल के हालात आशंका जता रहे हैं कि यह मर्डर कुकर्म छिपाने के लिए किया गया। जानवरों ने शव को नोच खाया था जिससे पोस्टमार्टम में कुकर्म की पुष्टि नहीं हुई है।
मुकुटलाल लोधी के पांच बच्चों में चौथे नंबर का अजय गांव के ही प्राइमरी स्कूल में कक्षा दो का छात्र था। 16 जून की दोपहर 12 बजे वह अचानक गायब हो गया। गुरुवार सुबह शौच को गए एक ग्रामीण ने गांव से आधा किमी दूर यूकेलिप्टस से घिरे चरी के खेत में अजय का क्षतविक्षत शव देखा तो शोर मचाया। मौके पर भीड़ जुट गई। कुछ देर बाद पुलिस भी पहुंची। अजय के शव का एक पैर और कूल्हा जानवर खा चुके थे। गले पर कटे का निशान था। सिर के पीछे भी गहरी चोट थी। शरीर पर सिर्फ बनियान थी। नेकर खेत में कुछ दूर पड़ा था। चेहरा काला पड़ चुका था। ग्रामीणों ने हत्या से पहले बच्चे के संग कुकर्म करने की आशंका जताई, हालांकि सीओ ने इसे नकार दिया। शव पोस्टमार्टम को भेजा गया। इसमें गला रेतने से मौत की पुष्टि हुई। कूल्हे का हिस्सा गायब होने से कुकर्म की पुष्टि न हो सकी। बच्चे की हत्या दो दिन पहले ही कर दी गई थी। अजय की दादी तुलसा देवी ने बताया कि खुशाल ही टॉफी दिलाने के बहाने अजय को घर से ले गया था। मुकुट ने बताया कि साल भर पहले घर की किसी बात पर खुशाल से उसका झगड़ा हुआ था। गांव वालों ने सुलह कराई तो दोनों में से किसी ने तहरीर नहीं दी। मुकुटलाल ने भतीजे 25 वर्षीय खुशाल पुत्र छेदालाल पर बेटे की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। खुशाल उसी दिन से फरार है जिस दिन से बच्चा गायब हुआ था। पुलिस ने उसके पिता छेदालाल, मां कमला और पत्नी सोना को हिरासत में लेकर खुशाल पर गिरफ्तारी का दबाव बनाया है।
छह माह का था जब मां चल बसी
दुनका। अजय को उसकी मां छह माह का छोड़कर चल बसी थीं। तुलसा ने ही उसे और उसके चार अन्य भाई-बहनों की परवरिश की। नाती की हत्या से आहत दादी पछाड़ें खा रही थीं। भूमिहीन मुकुट मजदूरी करके बच्चों का पेट पाल रहा था। पांच बच्चों में अब तीन बेटे और एक बेटी बचे हैं।