इन दिनों जब शहर बवाल दर बवाल से जूझ रहा है तो भी पुलिस सतर्कता से काम नहीं ले रही। कई थानों से लेकर मोबाइल ड्यूटी में रहने वाली पुलिस की गाड़ियों में जरूरी उपकरण और संसाधनों का अभाव रहता है। अति विश्वास की इस स्थिति से किसी दिन बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कायदे से थानों की गाड़ियों में वायरलेस, माइक समेत हूटर, डंडे, हेलमेट और बाडी प्रोटेक्टर होना चाहिए। गाड़ी में शीशे पर लोहे की जाली और टार्च होना भी जरूरी है। जबकि अफसरों की गाड़ी में आंसू गैस के लिए यूज की जाने वाली रायट गन और इंस्टूमेंट के साथ रबर गन होना चाहिए। थानों की जीप और चेतक आदि मोबाइल गाड़ियों की ही बात करें तो वायरलेस, हूटर के अलावा तीसरी चीज यहां नहीं दिखती। किसी गाड़ी में एकाध डंडा रखा दिखता है तो किसी में एकाध हेलमेट। मौजूदा माहौल के हिसाब से यह काफी खतरनाक स्थिति है।
वर्जन
सभी थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाडी प्रोटेक्टर और हेलमेट आदि वाहनों में हर वक्त रखें। किसी भी समय इसे चेक किया जा सकता है। रेस्पांस टाइम को लेकर भी निर्देश दिया गया है।- राजीव मल्होत्रा, एसपी सिटी