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बाहरी न बुलाते तो न होता बवाल

Sat, 13 Jun 2015 01:33 AM IST
बरेली
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 छेड़छाड़ को लेकर इसरार और मंजीत के बीच रंजिश की खाई एक साल से चौड़ी हो रही थी। मंजीत के एकतरफा प्यार में आए दिन छेड़छाड़ करने से परेशान होकर इसरार ने एक महीने पहले बहन की शादी कर दी थी। मंजीत और उसके साथी शादी में बवाल न कर दें, इसी डर से इसरार ने अपने गांव में ही बारात बुलाई थी। हालांकि मंजीत इसरार की बहन को एक साल से परेशान कर रहा था। कारखाने का कारीगर होने की वजह से मोहम्मद उमर और उसके साथी दूसरे समुदाय का होने के बाद भी मंजीत की मदद करते थे।  
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मंजूर का इसरार की वेल्डिंग की दुकान पर आना-जाना रहता था। इसरार को जब यह मालूम हुआ कि मंजूर पुलिस के करीबी हैं। उनका थाने में आना-जाना रहता है। इस पर उसने मंजूर अहमद से संबंध बनाकर मदद मांगी। इसरार का परिवार बदायूं से आकर करेली में बसा है। इसलिए गांव के लोगों से भी उनका लगाव नहीं था। इसरार की पिटाई के बाद शुक्रवार को मंजूर और अनीस उसकी तरफ से गांव पहुंचे तो गांव में यह फैल गई कि बदमाश बुलाए हैं। यह बात करेली गांव के लोगों को गवारा नहीं हुई। इसरार की तरह से दबंगई दिखाने के लिए मंजूर और उसका साथी पहुंचा तो मंजीत और अपने भतीजे मोहम्मद उमर की तरफ से भूरा भी साथियों के साथ असलहे लेकर पहुंच गया। मूंछ की इस जंग में कोई किसी से खुद को कम आंकने को तैयार नहीं था। नतीजा यह निकला कि कहासुनी के बाद बात बढ़ती ही गई। मंजूर ने हमला होने की संभावना देखकर असलहा निकालकर फायर किया तो पथराव होने लगा। इसके बाद मंजूर और लड़की के भाई इसरार की बाइक जला दी गई। पथराव में जहीर की ईंटों को इस्तेमाल किया गया। ग्रामीणों में इसरार को लेकर गुस्सा इसलिए था कि उसने बाहर से लोग क्यों बुलाए। कोई बात थी को गांव के जिम्मेदार लोग भी तो बैठाकर मसले का हल कर सकते थे।


छेड़छाड़ से शुरू हुई कहानी अभी खत्म नहीं हुई
बरेली। करेली गांव में लड़की से छेड़छाड़ के बाद शुरू हुई कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। पुलिस ने इस मामले में दोनों तरफ से भले ही 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके कड़ी कार्रवाई की है। लेकिन अभी तक गिरफ्तारी सिर्फ तीन ही लोगों की हो पाई है। तीन लोगों का इलाज चल रहा है। अस्पताल से रेफर होते ही उन्हें भी सलाखों के  पीछे कर दिया जाएगा।
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फिलहाल इस मामले में नामजद जो लोग अभी पुलिस पकड़ से बाहर हैं, उनसे भी खतरा कम नही है। दोनों पक्षों के लोगों की जमानत होने के बाद भी पुलिस को इस मामले की निगरानी करनी होगी। वरना यह विवाद फिर से संघर्ष की एक नई कहानी लिख सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक करीब एक साल से मंजीत कारखाने के पड़ोस में होने की वजह से लड़की के घर के आगे खड़ा हो जाता था। उमर का यह कारखाना लड़की के घर के पड़ोस में मुन्तियाज अहमद के मकान में है। लड़की के परिवार के लोग इसका विरोध करते थे। तीन बार यह मामला पुलिस के पास गया। 15 अप्रैल को इसरार ने मद्दा, उमर और मंजीत के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट करने के दौरान दांत तोड़ने का आरोप लगाते हुए मुकदमा लिखाया। पुलिस ने उमर को थाने से ही नोटिस देकर छोड़ने के बाद मंजीत और मद्दा को जेल भिजवा दिया था। चार दिन पहले उमर ने इसरार और उसके भाई को फंसाने के लिए साजिश रची थी। पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर एनसीआर दर्ज करके झूठा होने से पर उसे खारिज कर दिया था। इस मामले को गंभीरता से लेकर दोनों पक्षों के साथ सख्ती से पेश आया जाता तो यह नौबत नहीं आती। मंजूर के दोनों पक्षों के फैसला करा देने के बाद भी दिलों की दूरियां कम नहीं हुई थीं। दोनों पक्षों में चिंगारी सुलग रही थी। यही वजह रही कि शुक्रवार को फिर से बवाल हो गया।

इन लोगों के खिलाफ लिखा मुकदमा
वादी-मंजूर, आरोपी भूरा, मंजीत, उस्मान, मोहम्मद उमर, परवेज, इकबाल और चांदबाबू।
वादी-चांदबाबू-आरोपी इसरार, अबरार, मेंहदी हसन, अनीस, मंजूर अहमद, अशरफ और सद्दाम।
आरोप-दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मारपीट, पथराव, आगजनी करने का आरोप लगाया है।
 
-कानून से खिलवाड़ करने वाले किसी की व्यक्ति से साथ भी रियायत नहीं होगी। उपद्रव करने वाले सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई जा रही है-धर्मवीर यादव, एसएसपी


करेली में दो पक्षों के आमने-सामने आने की खबर मिलने पर वह भी मौके पर गए थे। हमारा काम गांव में अमन शांति कायम कराना है। जो गुनाहगार हो, पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी। लेकिन हमारी कोशिश अब भी यही है कि दोनों पक्षों में समझौता हो जाए-अफरोज हुसैन, प्रधान करेली

करेली पर पहले भी लग चुका है दाग
करेली गांव पर सवा साल पहले भी दाग लग चुका है। यहां बारात पर पथराव होने के बाद दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। बवाल की वजह से करीब एक महीना पुलिस का पहरा रहा था। दस दिन तक तो पुलिस-प्रशासन के अफसरों को गांव में पीएसी तैनात करनी पड़ी थी। सियासी लोगों ने भी इस बवाल के बाद खूब राजनीतिक रोटियां शेखी थीं। खुराफाती लोगों ने करेली के सहारे शहर का माहौल भी बिगाड़ने की कोशिश की थी।
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