मसलकों का मसला अभी आसानी से हल होता नहीं दिख रहा है। शनिवार को नबीर-ए-आला हजरत मौलाना तसलीम मियां ने जिला प्रशासन से माह-ए-रमजान से पहले मस्जिद का ताला खुलवाने की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि प्रशासन ने ताला नहीं खुलवाया तो वह खुद खोलकर नमाज पढ़ेंगे। ताजुश्शरिया मुफ्ती अख्तर रजा खां (अजहरी मियां) के नमाज पढ़ाने का ऐलान कर दिया जाएगा। फिर बरेली ही नहीं दिल्ली और देश भर में देवबंदी मसलक के लोगों ने जो मस्जिदों पर कब्जा कर रखा है, उन्हें मुक्त कराया जाएगा।
कादरी हाउस (बिहारीपुर) में पत्रकारों से बात करते हुए मौलाना तसलीम मियां ने कहा कि प्रशासन का 15 दिन का समय पूरा हो रहा है। हुकूमत भी हमारे साथ है। हालांकि हमें लगा था कि हुकूमत में बैठे लोगों के इशारे पर प्रशासन काम कर रहा है। लेकिन ऐसा नहीं है, प्रशासन देवबंदी मसलक के चंद लोगों के दबाव में है। उन्हीं के दबाव में मस्जिद को लेकर गलत फैसला किया गया। अंजुमन इस्लामियां ने प्रशासन को सारे कागज सौंपे हैं। मस्जिद हमारी है, माह-ए-रमजान आ रहा है, हमें मस्जिद चाहिए। लखनऊ में भी हमारी कई नेताओं से बात हुई है। वह भी हमारा साथ देने को तैयार हैं। प्रशासन ने उन्हें मस्जिद नहीं दिलाई तो हम खुद ताला खोलकर उसे आजाद कराएंगे। शहर काजी मौलाना असजद मियां से हमारी बात हो गई है। ताजुश्शरिया अजहरी मियां के मस्जिद में नमाज पढ़ने का ऐलान कर दिया जाएगा। तब प्रशासन भीड़ नहीं संभाल पाएगा, क्योंकि तब देश भर से अजहरी मियां के मुरीद नमाज पढ़ने आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि कुतुबखाना मस्जिद की दुकानों में सिर्फ तीन दुकानदार देवबंदी मसलक के हैं। बाकी सभी दुकानदार बरेलवी मसलक के हैं। बरेली ही नहीं, अब दिल्ली तक मस्जिदों पर देवबंदियों द्वारा किए गए कब्जों की लड़ाई लड़ी जाएगी। इस मौके पर डॉक्टर नफीस अहमद, फैज रजा खां, आसिम रजा खां, चांद भाई, नुसरत अली खां और पम्मी वारसी आदि मौजूद रहे।
तेरह को दिल्ली में ताकत दिखाएंगे
नबीर-ए-आला हजरत मौलाना तसलीम मियां ने कहा कि 13 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर मैदान में देश भर से तमाम खानकाहों के लोग पहुंच रहे हैं। दिल्ली में सुन्नियत पर चर्चा होने के साथ तमाम मसलों पर बात होगी। देशभर में सुन्नियों के सैकड़ों मस्जिदों पर दूसरे लोगों ने कब्जा कर लिया है। अकेली दिल्ली में ही ऐसी 240 मस्जिदें हैं। उन पर भी विस्तार से बात की जाएगी। उनका कहना था कि दिल्ली की जामा मस्जिद भी शाहजहां ने बनवाई थी। वह सुन्नी थे, उस पर भी बात होनी है। जिन मस्जिदों पर दूसरे लोगों का कब्जा है, उनके इमामों का वेतन खानकाहों से दिया जाता है।
हम भी तो सुन्नी हैं
-प्रशासन पर हमें पूरा भरोसा है। कानून का पालन करना चाहते हैं। वरना भीड़ हम भी जुटा सकते हैं। हम अपील करते हैं कि प्रशासन धारा 144 को सख्ती से लागू कराए। हमें कोर्ट में जाने की जरूरत ही नहीं है। कुतुबखाना मस्जिद में हम सालों से नमाज पढ़ते आ रहै हैं। वहां के नमाजियों का कहना है कि अंजुमन इस्लामियां कमेटी ने पिछले दस सालों में तमाम घपले किए हैं। उन मामलों की जांच होनी चाहिए। जहां तक सुन्नियत का सवाल है, हम भी तो एहले सुन्नत वल जमात से हैं। इमाम-ए-आजम इमाम अबू हनफी को मानने वाले हैं। - हाफिज मोहम्मद आसिफ , महानगर अध्यक्ष, जमीयत उलमा-ए-हिंद