पीलीभीत के मीरपुर वाहनपुर गांव निवासी सपा नेता इरशाद खां ने बृहस्पतिवार को डीआईजी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि फर्जी पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के आरोप में वह तो जेल काट आए, लेकिन जिन तेरह लोगों के खिलाफ कोतवाली में फर्जी पतों पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने के आरोप में मुकदमा दर्ज है, उनकी भी गिरफ्तारी होनी चाहिए। उनका आरोप है कि पुलिस ढाई लाख रुपये लेकर चुप बैठ गई है। विवेचक का तबादला होने के बाद किसी ने मामले की सुध नहीं ली।
इरशाद ने भुता स्थित अपनी सुसराल के पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाया था। पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हाल ही वह जमानत पर छूटकर आए हैं। उन्होंने 14 फरवरी को अपने ही गांव के आबिद हुसैन, साबिर हुसैन, सद्दीक अहमद, महादेवा के बुंदा खां, परवेज खां, अभयपुर चेना नकटिया के रहीसुद्दीन, उनके भाई जलालुद्दीन के अलावा इसी गांव के अलाउल्ला खां, मसीयार खां, मुन्ने खां, मुंशी खां, नबी शेर खां और रसायनखानपुर गांव के मैसर हुसैन के खिलाफ बरेली के फर्जी पतों पर शस्त्र लाइसेंस बनवाने का आरोप लगाते हुए डीआईजी के आदेश पर कोतवाली में मुकदमा लिखाया था। इरशाद ने डीआईजी से कहा कि कोतवाली पुलिस ने मामला दबाने के लिए ढाई लाख रुपये ले लिए हैं। मामले की विवेचना दरोगा यश कुमार को दी गई थी। उनका तबादला होने के बाद से जांच थम सी गई है। डीआईजी ने इरशाद को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।