प्रेमनगर थाने से जहां बीटेक की एक छात्रा माता-पिता के आंसुओं से पसीजकर प्रेमी से अलग होकर घर चली गई वहीं बिशारतगंज की एक लड़की परिवार वालों को सौंपने का कोर्ट का आदेश सुनकर अपने माता-पिता के पैरों पर गिर पड़ी। उसका कहना था कि उसे प्रेमी के साथ जाने दो। वह उसके बगैर नहीं रह सकती है, लेकिन माता-पिता ने उसकी एक नहीं सुनी। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने लड़की को घर तक पहुंचा दिया।
कस्बा बिशारतगंज इलाके की एक लड़की फरवरी के पहले सप्ताह में अपने रिश्ते के फुफेरे भाई के साथ चली गई थी। पिता ने दस फरवरी को उसके प्रेमी और परिवार के खिलाफ मुकदमा लिखा दिया था। पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की तो लड़का नहीं मिल पाया, लेकिन लड़की बरामद हो गई। लड़की का मेडिकल कराया गया को उसे बालिग बताया जा रहा था, लेकिन पिता ने उसकी तीन शैक्षिक प्रमाण पत्र कोर्ट में दाखिल किए। तीनों में लड़की की जन्म तिथि अलग-अलग थी। एक शैक्षिक प्रमाण पत्र में 15 जून 1998 है। दूसरे में 10 जुलाई 1997 है जबकि तीसरे में एक जनवरी 1998 है। मंगलवार को सप्लीमेंट्री रिपोर्ट मिलने के बाद विवेचक ने लड़की को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने लड़की को नाबालिग मानते हुए परिवार वालों के सुपुर्द करने के आदेश दे दिए। इस पर पुलिस ने लड़की को परिवार वालों को सौंप दिया। पुलिस के मुताबिक लड़की कचहरी परिसर में ही माता-पिता के पैरों पर गिरकर गिड़गिड़ाती रही। लड़की का कहना था कि वह प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है, लेकिन नाबालिग होने की वजह से उसका कहने का कोई नतीजा नहीं निकला। एसओ ने बताया कि लड़की के प्रेमी की पाक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार करके जेल भेजा जाएगा। उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रहे हैं।