आजम खां के नाम से फेसबुक पर फर्जी भड़काऊ पोस्ट करने के आरोप में जब बरेली का छात्र गुलरेज जेल में था, तब 19 मार्च को उसके परिवार वाले उसकी जमानत कराने रामपुर पहुंचे। अदालत जाते समय टेंपो चालक से गुलरेज की जमानत के लिए किसी नामी वकील के बारे में पूछा तो आजम का जिक्र आते ही वह उन्हें रास्ते में ही टेंपो से उतार गया। परिवार वालों का आरोप है कि मंत्री से मामला जुड़ा होने पर रामपुर में कोई भी डर के मारे उनकी मदद करने को तैयार नहीं था। जिससे मदद मांगते वही किनारा कर लेता था।
गुलरेज के पिता आवेज और ताऊ परवेज बताते हैं कि वह एक होटल में चाय पीने गए और यहां भी मदद के लिए जिक्र किया तो होटल वाले ने उनसे कहा कि भाई साहब जल्दी चाय पीओ और चले जाओ। इस पर वह चुपचाप चाय की दुकान से उठकर चल दिए। परवेज ने बताया कि यह सब झेलने के बाद उन्होंने कांग्रेसियों का सहारा लिया। कांग्रेस नेता नूर बानो और फैसल उनकी मदद को आए। कांग्रेस नेताओं ने गुलरेज की जमानत कराने में उनकी मदद की जिससे वह जेल की सलाखों के बाहर आ सका। इसके लिए कांग्रेसियों के हमेशा शुक्रगुजार रहेंगे।
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धमकी मिलने पर खिसक गया था जमानती
परवेज ने बताया कि सत्ता पक्ष वालों ने न सिर्फ गुलरेज की जमानत कराने में अड़ंगा डाला, बल्कि जमानती तक को धमकाया गया। एक जमानती के फोन पर धमकी आई तो वह अदालत से ही डर कर चला गया था। बाद में उन्होंने बमुश्किल जमानती ढूंढा।
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अल्लाह ने सुनी हमारी
पिता आवेज खां कहते हैं कि बेटे के बेवजह पचड़े में फंस जाने से वह बेहद परेशान हो गए थे। बेटे को इस मुसीबत से बचाने के लिए वह हर दिन अल्लाह से दुआ मांगते थे। दिमागी उलझन में कामकाज भी ठप हो गया था। पूरा परिवार परेशान था और मंगलवार को जब आईटी एक्ट पर अदालत का फैसला आया तो सारी टेंशन दूर हो गई।