बदायूं के नए कप्तान सौमित्र यादव के जांच में क्लीनचिट देने पर सात दागी सिपाहियों का तबादला रुका है। जबकि मूसाझाग और उझानी की घटना के बाद ग्यारह सिपाहियों के खिलाफ तत्कालीन एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने जांच रिपोर्ट भेजकर दूसरे जिलों में तबादला करने की संस्तुति की थी। पहले कप्तान की रिपोर्ट में सच्चाई थी या नए कप्तान की रिपोर्ट सही है इस बात पर कोई अफसर बोलने का तैयार नहीं है।
मूसाझाग और उझानी कांड के बाद बदायूं के तत्कालीन एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने ग्यारह पुलिस कर्मियों की सूची बनाकर सभी का तबादला दूसरे जिलों में करने की सिफारिश कर दी थी। उन्होंने यह आशंका जताई थी कि सूची में शामिल सिपाहियों के रहते मूसाझाग जैसी घटनाएं फिर से दोहराई जा सकती है। सूची में एसएसपी के हेड पेशी वीरेंद्र यादव भी शामिल थे। डीआईजी ने इन सिपाहियों का पीलीभीत, बरेली और शाहजहांपुर में तबादला करने के बाद सभी सिपाहियों को 25 जनवरी को रिलीव कर दिया था। तबादला होने के बाद तैनाती वाले स्थान पर किसी पुलिस कर्मी ने आमद नहीं कराई। बाद में दबाव बनने पर सभी पुलिस कर्मियों ने आमद तो करा ली, लेकिन डीआईजी को प्रार्थना पत्र देकर कहा कि हमारी फिर से जांच करा ली जाए। हमारे खिलाफ काई शिकायत नहीं है।
नए एसएसपी सौमित्र यादव ने वीरेंद्र यादव, मुकेश यादव, रवींद्र सिंह, विनोद कुमार, सतेंद्र सिंह, अशोक कुमार और धर्मेंद्र कुमार यादव सात पुलिस कर्मियों को क्लीनचिट दे दी। इसी आधार पर डीआईजी ने सातों का तबादला निरस्त करके बदायूं में ही उन्हें दूसरे स्थानों पर तैनात करने को कहा है। जबकि पीलीभीत भेजे गए प्रवीन कुमार, रामवीर यादव, नरेश कुमार और बरेली में तैनात हुए वतन सिंह अभी दागियों की सूची में शामिल हैं। डीआईजी आरकेएस राठौर ने बताया कि एसएसपी की रिपोर्ट पर सात पुलिस कर्मियों के तबादले रुके हैं। यह इतना बड़ा इश्यू नहीं है, उन्हें दूसरे स्थानों पर तैनात किया गया है।