क्राइम ब्रांच ने नोट दोगुना करने का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह सौ का असली नोट ऊपर और नीचे लगाकर नोट के बराबर आकार के कागज के टुकड़ों की गड्डी थमाकर ठगी करता था। गिरोह के सरगना समेत तीन ठग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। गिरोह अब तक करीब 22 लोगों से लाखों रुपये ठग चुका है। पकडे़ गए ठगों के पास से कागज की छह गड्डियां बरामद हुईं हैं, जिनके ऊपर-नीचे तो एक-एक सौ का नोट लगा है और बीच में कागज के टुकड़े हैं।
पुलिस के मुताबिक, शहर में पिछले लंबे अर्से से रुपये दोगुनों करने का लालच देकर ठगी करने वालों का गिरोह सक्रिय था। क्राइम ब्रांच की इंटेलीजेंस विंग के प्रभारी विकास सक्सेना, एसआई हरीश रावत, राम किशोर पटेल, रामेंद्र यादव, योगेंद्र सिंह, अंकुर, आकाश आदि इस गिरोह को पकड़ने के प्रयासों में लगे हुए थे। पुलिस टीम को बृहस्पतिवार को शाम चार बजे उस समय कामयाबी मिल गई, जब गिरोह के तीन ठग किला पुल के पास कागज की गड्डी लेकर किसी को ठगने की फिराक में खड़े थे। तीनों को दबोच कर पुलिस किला थाने ले आई। पकड़े गए आरोपियों ने अपना नाम अजीत चौहान उर्फ सुनील पुत्र कृष्ण पाल निवासी पुरैनी थाना दातागंज (बदायूं), प्रदीप कुमार पुत्र बादशाह, हरिओम पुत्र लाला गोस्वामी निवासी आनंद विहार कॉलोनी थाना फरीदपुर (बरेली) बताया। हरिओम मूल रूप से फतेहगंज पूर्वी के गांव रिउना धीमरा का रहने वाला है और इस समय फरीदपुर की आनंद विहार कॉलोनी में रहता है। इंटेलीजेंस विंग प्रभारी विकास सक्सेना ने बताया कि अजीत चौहान गैंग का सरगना है। ये गिरोह अब तक करीब 22 लोगों को ठग चुका है।
बरेली से लेकर गाजियाबाद तक फैलाया ठगी का जाल
इंटेलीजेंस विंग टीम के प्रभारी विकास सक्सेना ने बताया कि दातागंज (बदायूं) के पुरैना का रहने वाला अजीत चौहान उर्फ सुनील बड़ा ठग है। उसका नेटवर्क बरेली के अलावा रिठौरा, नवाबगंज से लेकर गाजियाबाद तक फैला है। वहां भी वह कई लोगों को ठग चुका है। उससे जुड़े अन्य ठगों के बारे में पता लगाया जा रहा है।
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हरिओम और प्रदीप झांसे में लेते थे लोगों को
कागज के टुकड़े देकर ठगी के आरोप में पकड़े गए हरिओम और प्रदीप बरेली, नवाबगंज, रिठौरा में भोले-भाले लोगों को रकम दोगुनी होने का लालच देकर झांसे में लेते थे। इसके बाद ये दोनों ठग झांसे में आने वाले की बात अजीत चौहान से कराते थे और व्यक्ति को कागज के टुकड़ों की गड्डी थमाकर असली नोट लेने के बाद रफूचक्कर हो जाते थे।