बदायूं डिपो में कई साल से नौकरी कर रहे दो दर्जन से ज्यादा संविदा ड्राइवरों के लाइसेंस गड़बड़ मिले हैं। संदेह की बात यह है कि ये सभी लाइसेंस फतेहगढ़ के एआरटीओ कार्यालय से जारी हुए हैं लेकिन जब सत्यापन कराया गया तो वहां इनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। लिहाजा इन लाइसेंसों को फर्जी माना जा रहा है। हालांकि अभी न इस मामले में कोई जांच बैठाई गई है, न कोई कार्रवाई की गई है।
करीब पांच साल पहले बदायूं डिपो में बड़े पैमाने पर संविदा ड्राइवरों की भर्ती हुई थी। अंदेशा है इसी दौरान कई आवेदक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के जरिये भर्ती हो गए। भर्ती होने ड्राइवरों में से 40 लाइसेंस तो फतेहगढ़ एआरटीओ कार्यालय से ही जारी हुए थे। परिवहन विभाग ने हाल ही में इन सभी ड्राइवरों के लाइसेंस का सत्यापन फतेहगढ़ के एआरटीओ कार्यालय से कराया तो वहां से दो दर्जन ड्राइविंग लाइसेंसों को संदिग्ध बताया गया। आरएम को भेजी रिपोर्ट में फतेहगढ़ परिवहन कार्यालय ने इन लाइसेंसों का कोई रिकार्ड उपलब्ध न होने की बात कही है।
एआरटीओ फतेहगढ़ देवमणि भारती ने अमर उजाला को बताया कि कई लाइसेंसों का उनके कार्यालय में रिकार्ड नहीं मिला है लेकिन उन्होंने इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी कि लाइसेंस असली हैं या फर्जी। आरएम बरेली एसके शर्मा ने बताया कि फर्जी लाइसेंस का मामला अभी उनकी जानकारी में नहीं आया है। अगर कोई ऐसा मामला है तो उचित कार्रवाई होगी। उधर बदायूं के एआरएम जेपी सिंह ने लाइसेंस फर्जी होने से इंकार किया है। उन्होंने कहा है कि दफ्तर खुलने के बाद मामले की पड़ताल करने के बाद ही वह कुछ बता पाएंगे।
फर्जीवाड़े का गढ़ है फतेहगढ़
फतेहगढ़ एआरटीओ कार्यालय में कई साल पहले आग लगने से एक साल का रिकार्ड जल गया था। इसी घटना से फर्जीवाड़े का रास्ता निकला। दलाल इसके बाद अवैध वसूली कर उसी वर्ष के ड्राइविंग लाइसेंस जारी कराते रहे। कई मामलों में किसी के वैध लाइसेंस के नंबर पर दूसरा लाइसेंस जारी किया गया तो कभी सिर्फ फर्जी साइन और मुहर के जरिये लाइसेंस बना दिया गया। देश भर में यहां से जारी फर्जी लाइसेंस का मामला खुलने के बाद शीर्ष एजेंसियां तक इसकी जांच कर चुकी हैं।