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अलीगंज थाने की जमीन भी बेच दी

Fri, 20 Feb 2015 02:34 AM IST
बरेली
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 एसआई अनवर खलील के अनुसार गाटा संख्या 439, 440, 441, 442, 445, 453 और 454 का 1961 में मुआवजा अदा कर अधिग्रहण किया गया था। तब से अलीगंज पुलिस इस जमीन पर काबिज है। इसका इंद्राज तहसील अभिलेख के खसरा 14221 में थाना अलीगंज के नाम दर्ज है।  इसी 13 फरवरी को लेखराज, सेवाराम, चंद्रपाल, अनोखे, तिरमल, रामचंद्र, पूरनलाल, बाबूराम, मुन्नालाल, बनवारी, जमुना प्रसाद, जयदेवी, नरेश, राजू, कमल, राजकुमार, भूपराम, तीलाधर, कृपाल, डालचंद और गोविंद ने फर्जी कागज तैयार कर सीबीगंज के बादशाहनगर निवासी रमेश के नाम गाटा संख्या 439 के हिस्से का विभाजित बैनामा करवा दिया। इसमें मनोहर लाल और चंद्रपाल ने गवाही दी। एसआई के अनुसार अधिग्रहण कराने वाले खेमकरन, हीरालाल और दिलसुख की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी उनके वारिसों ने तहसील अभिलेखों में अपना नाम दर्ज किए बिना जमीन बेच दी। पुलिस ने अब खरीददार, विक्रेता और दोनों गवाहों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी है। एसओ राकेश यादव ने कहा कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। एसओ की शिकायत पर एसडीएम पुष्पा देवराज ने बेची गई जमीन की दाखिल खारिज तहसील अभिलेखों में करने पर रोक लगा दी है।
 
खतौनी तो बदली नहीं थी
थाने की जमीन खसरा में तो दर्ज है लेकिन खतौनी में जमीन के मालिकों का नाम ही चला आ रहा है। जमीन के मालिकों ने इसका फायदा उठाकर पुलिस वालों को ही आइना दिखाना चाहा मगर तहसील में मामला पकड़ में आ गया। सवाल उठता है कि 1961 से अब तक थानाध्यक्ष अपनी ही जमीन के बारे में जानकारी क्यों नहीं जुटा पाए।
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अभी मैंने फाइल देखी नहीं है। हालांकि खतौनी में जिसका नाम दर्ज है वह बैनामा कर सकता है। थाने वालों के पास इस जमीन की वसीयत नहीं हैं इसलिए खतौनी में नाम नहीं चढ़ा है। खसरे में मौके पर देखकर इंद्राज किया जाता है।-मनोज कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार आंवला।
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