राज्य सरकार के लिए पुष्टाहार बनाने वाली दिल्ली की तीन कंपनियों की बरेली शाखा के डायरेक्टर प्रवीण खंडेलवाल ने एक क्लर्क के खिलाफ अस्सी लाख रुपये के गबन का मामला कोतवाली में दर्ज कराया है। यह गबन उसने अपनी पत्नी और भाई के खातों में रकम ट्रांसफर कर किया। मामले की रिपोर्ट एसएसपी के निर्देश पर दर्ज की गई है।
दिल्ली की मैसर्स देवेश फूड्स एंड एग्रो प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड की ब्रांच सिविल लाइंस में है। यह फर्म राज्य सरकार के लिए पुष्टाहार बनाने और उसकी आपूर्ति का काम करती है। दिल्ली की मैसर्स वर्ल्ड वाइड होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड की शाखा भी सिविल लाइंस में है। इस फर्म में क्लर्क मढ़ीनाथ निवासी पवन कुमार मिश्रा काम करता था। आरोप है कि दोनों कंपनियों के डायरेक्टर का भरोसा हासिल होने के चलते कंपनी के निदेशक प्रवीन खंडेलवाल ने उसे परिसर में काम करने वाली इंटर लिंक फूड्स सहित तीन कंपनियों के बैंक खाते, लोन खाते और चेक बुक की देखरेख का काम सौंप दिया। इस दौरान उसने कई ब्लैंक चेक पर डायरेक्टर प्रवीन खंडेलवाल के हस्ताक्षर करा लिये। कंपनी पुष्टाहार बनाने के बाद टैक्स जैसे अन्य भुगतान ऑनलाइन करती है। कंपनी के खाते पीएनबी की सिविल लाइंस शाखा में हैं। इस बैंक में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने पर पवन के खाते से भुगतान किए गए। आरोप है कि पवन ने अपनी पत्नी विनीता के खातों के जरिये 30 लाख रुपये की राशि का गबन कर लिया। इसमें पवन का भाई कुलदीप भी शामिल रहा।
पवन ने टैक्स के चेकों में हेरफेर करके अपने भाई के खाते में दस लाख रुपये जमा कराए। चेक पर मुकेश एजुकेशन सोसाइटी लिखकर भुगतान कराया गया। बाद में चेक का हिसाब लेेने पर 80 लाख का गबन सामने आया। पवन को काम से हटा दिया गया। परिवार ने इंटरलिक्स कंपनी के नाम पर 30 लाख और वर्ल्ड वाइड होल्डिंग प्रा. लि. के नाम पर 50 लाख का पोस्ट डेट चेक दिया जो बाउंस कर गया। इसका वाद न्यायालय में दायर किया गया। 12 फरवरी को प्रवीन खंडेलवाल के पास मेसेज आया कि 50-50 लाख के चार चेक बैंक में लगाए गए हैं। दो करोड़ की यह रकम पवन मिश्रा ने निकालने का प्रयास किया, लेकिन मामला उजागर हो गया।