डीजीपी जावीद अहमद के आदेश का एसएसपी और एसपी पर कोई असर नहीं है। बिजनौर, संभल, मुरादाबाद और अमरोहा में कुछ फेरबदल तो हुआ है, लेकिन प्रमाण पत्र संभल को छोड़कर किसी ने अभी तक आईजी को नहीं भेजा है। जबकि आईजी ने नए आदेशों का पालन करने का बीस जनवरी तक सभी जिलों के कप्तानों से प्रमाण पत्र मांगा था।
नए डीजीपी ने कार्यभार संभालते ही थानाध्यक्ष पदों पर नियुक्ति के लिए सभी जिलों के कप्तानों को दिशा निर्देश जारी किए थे। डीजीपी ने स्पष्ट कर दिया कि तीन साल की सेवा अवधि पूरी करने वाले उप निरीक्षकों की थानाध्यक्ष पदों पर नियुक्ति होनी चाहिए। 58 साल से ज्यादा उम्र का कोई भी इंस्पेक्टर और उप निरीक्षक थानाध्यक्ष नहीं बनाया जाए। ऐसे लोगों को भी थानाध्यक्ष नहीं बनाया जाए जिनकी पिछले पांच साल में सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र रोका न गया हो। तीन साल से जिसे सजा न मिली हो। इसके अलावा इंस्पेक्टरों को भी अब थानाध्यक्ष बनाए जाने के लिए डीआईजी से वरिष्ठता के आधार पर अनुमोदन कराना होगा। दागी इंस्पेक्टरों के भी किसी थाने का थानाध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। हटाए जाने वाले थानाध्यक्ष को तीन महीने में दोबारा चार्ज देने पर डीआईजी को कारण बताना होगा। जनवरी और जुलाई माह में हर साल अनुमोदन कराने वालों की सूची की समीक्षा होगी। जोन के नौ जिलों में कुल 170 थाने हैं। इनमें से 89 बरेली में और 81 मुरादाबाद रेंज में हैं। डीजीपी के आदेश के बावजूद भी 25 बूढे़ इंस्पेक्टर और उप निरीक्षक सत्ताधारी नेताओं और अधिकारियों की मेहरबानी से थानाध्यक्ष बने हुए हैं। एसएसपी मुरादाबाद नीरज तिवारी ने 18 दिन पहले नौ थानाध्यक्षों को इधर से उधर किया है। एसपी अमरोहा नीरज त्यागी ने एक बुजुर्ग एसओ को हटाया है। एसपी बिजनौर ने भी बूढ़े थानाध्यक्षों को हटाकर कुछ फेरबदल कर दिया है। एसपी संभल अतुल श्रीवास्तव ने बुजुर्ग थानाध्यक्षों को हटाकर आईजी को प्रमाण पत्र भी भेज दिया है। बाकी किसी जिले के कप्तान ने समय पूरा होने के बाद भी आईजी को डीजीपी के आदेशों पर अमल करने के संबंधित प्रमाण पत्र नहीं दिया है।