एसटीएफ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम के साथ संयुक्त अभियान में परसाखेड़ा मोड़ के पास ट्रक की घेराबंदी करके 76 किलो चरस के साथ दो लोग गिरफ्तार किए हैं। ट्रक के डीजल टैंक से सटाकर एक और टैंक बना दिया था जो बाहर से देखने में बिल्कुल डीजल टैंक की तरह ही दिखता है। इसी टैंक में चरस की तस्करी हो रही थी। तस्करों ने बताया कि यह चरस नेपाल के उमाशंकर से खरीदकर ला रहे थे। इस माल की सप्लाई कैराना से दिल्ली और हरियाणा के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में होनी थी।
नेपाल से देश के कई हिस्सों में चरस की सप्लाई होने की सूचनाएं मिलने पर एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित पाठक ने अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के निर्देशन में बरेली इकाई इंस्पेक्टर अजय पाल सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन किया था। मुखबिर ने बताया कि नेपाल बार्डर से उत्तर प्रदेश के कस्बा बढ़नी, सिद्धार्थनगर होते हुए चरस की खेप शामली जिले के कस्बा कैराना जा रही है। एसटीएफ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम के साथ बड़ा बाईपास पर परसाखेड़ा मोड़ के पास ट्रक संख्या यूपी-12 टी-0232 घेराबंदी करके रोक लिया। उसमें सवार तस्कर मुकरिम पुत्र अली हसन निवासी अलकला, थाना कैराना, जिला शामली और इसी जिले और थाना क्षेत्र के ग्राम जहानपुर निवासी दानिश ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने दोनों को दौड़ाकर दबोच लिया। टीम ने ट्रक के डीजल टैंक में बनी कैविटी खुलवा देखी तो उसमें 76 किलो चरस के पैकेट रखे हुए थे। पुलिस ने कैविटी से पैकेट निकालकर सील करा दिए। एएसपी प्रशांत कुमार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करके जेल भिजवा दिया है। तस्करों से अन्य साथियों की तलाश करके उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
नेपाल का उमाशंकर असली खिलाड़ी
नशे के कारोबार का असली खिलाड़ी तो नेपाल का उमाशंकर ही है। वह शामली के कैराना कस्बा में रहने वाले भूरा के पास चरस भेजता है। वह अपने गुर्गों के जरिए चरस की खेप भारत-नेपाल सीमा पर सिद्धार्थनगर के बडनी कस्बे में पहुंचा देता है। यहां से मुकरिम और दानिश चरस ट्रक में लादकर कैराना के भूरे और कय्यूम को दे आते हैं। भूरा पश्चिमी उत्तर के सभी जिलों के अलावा दिल्ली और हरियाणा में चरस की सप्लाई करता है। मुकरिम और दानिश इससे पहले दो बार नेपाल से चरस लाक र भूरा को दे चुके हैं।
शामली में ही बनता है यह चोर बाक्स
जिस ट्रक की कैविटी में चरस मिली है। वह मुकरिम का है। यह कैविटी उसने शामली में ही बनवाई है। वहां कई मिस्त्री कैविटी बनाने का काम करता है। डीजल टैंक के अलावा और भी कई स्थानों पर कैविटी बनती है। नेपाल से माल लाने वालों को भूरा एक हजार रुपये प्रति पैकेट देते हैं।
बरामद 76 किलो चरस की कीमत भारतीय बाजार में करीब 15 लाख रुपये है। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस चरस की कीमत करीब 76 लाख रुपये है। अभियुक्तों से चार हजार रुपये, एक आधार कार्ड और एक डीएल मिला है।