मथुरापुर स्थित इस्लामिक स्टडीज सेंटर जामियतुर्रजा पर शरई काउंसिल ऑफ इंडिया का 14वां तीन दिवसीय सालाना फिकही सेमीनार आयोजित किया गया। ताजुश्शरीया मुफ्ती अख्तर रजा खां (अजहरी मियां) की सदारत में हुए इस सेमीनार में देश भर जाने माने उलमा जुटे। इसमें इस्लामी जगत में उठ रहे कई गंभीर मसलों के हल पर चर्चा की गई।
इस सेमीनार में जिन अहम मसलों में चर्चा की गई। इसमें खास तौर से तीन अहम बिंदू हैं। एक तो ये कि हज यात्रा के दौरान अगर औरत मुत्तलिका यानी तलाक हो जाए या बेवा (विधवा) हो जाए तो क्या करे? यानी वो हज के अरकान पूरा करे या इद्दत गुजारे। दूसरा एक्सीडेंट पर मुआवजा और ठेके के कमीशन पर शरई हुक्म क्या कहता है।
इसके अलावा बटाई की फसल पर फसल काटने की उजरत (आय) कटी हुई पैदावार पर देेने की शरई हैसियत क्या है? यानी फसल तैयार होने पर जमींदार, बटाई पर लेने वाले और किसान जिसने फसल के लिए खेती की। उनमें फसल के बिकने पर बंटवारा किस हिसाब से होना चाहिए। इन तमाम मुद्दों पर उलमा के बीच शरीयत की रोशनी में चर्चा की गई।
सेमिनार की शुरुआत खुत्बा-ए-इस्तकबालिया शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी व खुत्बा-ए-तनकीह मुहद्दिसे कबीर अल्लामा जियाउल मुस्तफा कादरी ने पढ़ा। इसके बाद इन मुद्दों पर गर्मागर्म बहस चली। इन सभी मुद्दों पर उलमा की राय सुरक्षित रख ली गई है। इस पर ताजुश्शरीया मुफ्ती अख्तर रजा खां (अजहरी मियां) दो दिन बाद अपने फैसले की मुहर लाएंगे।
इस बहस में शहर काजी मौलाना असजद रजा खां कादरी, मुफ्ती आशिक हुसैन, मौलाना जिलाउल मुस्तफा, मुफ्ती शब्बीर हसन, मुफ्ती रफीक आलम, मुफ्ती उजैर आलम, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती हबीब उल्ला आदि शामिल रहे। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि इस सेमिनार हुई चर्चा के मुद्दों पर फैसले का एलान 25 अप्रैल को किया जाएगा।
इस दौरान जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान मियां कादरी, काजिम रजा, मौलाना शकील, मुफ्ती नश्तर फारूकी, मौलाना शहजाद आलम, अतीक अहमद, आमिल हुसैन, नासिर कुरैशी, नावेद असलम, काजी गुलाम मुस्तफा, आबिद रजा आदि शामिल रहे। संचालन मुफ्ती शमशाद हुसैन ने किया।
सेमिनार के मुद्दे
ॎ सफर-ए-हज के दौरान औरत मुत्तलिका या बेवा हो जाए तो क्या करे?
ॎ एक्सीडेंट पर मुआवजा और उसकी शरआ?
ॎ ठेके के कमीशन का शरई हुक्म?
ॎ फसल काटने की उजरत कटी हुई पैदावार पर देने की शरई हैसियत?