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बरेली के तस्कर पिस्टल के बदले देेते हैं स्मैक

Wed, 08 Jun 2016 01:22 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला
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दिल्ली के तस्कर स्मैक के बदले बरेली में देशी पिस्टल बेच रहे हैं। कई दफा वह हथियारों की खेप देकर स्मैक  ले जा चुके हैं। फरीदपुर के नशे के सौदागर से वह माल लेते हैं। मंगलवार को भी वह इसीलिए बरेली आए थे। सेटेलाइट पर माल देकर हथियार लेने वाले को आना था, लेकिन पुलिस को देखकर वह भाग गया। पुलिस के पीछा करने पर स्कार्पियो लेकर भागे तस्करों को थाना इज्जतनगर पुलिस ने दबोच लिया। 
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सीओ तृतीय एएसपी आकाश तोमर ने बताया कि पूछताछ में नई दिल्ली के जनकपुरी में रहने वाले सोनू पुत्र राजकुमार उर्फ राजकिशोर और महावीर इन्क्लेव निवासी विजय कुमार ने यह खुलासा किया है। दोनों तस्करों के पास से एक छोटी तराजू भी बरामद हुई है। इस तराजू से वह कार में ही स्मैक को तोल लेते हैं। सोनू और विजय स्मैक खुद भी पीते हैं। उन्होंने बताया कि बरेली में देशी पिस्टल की बेहद डिमांड है। सीलमपुर(दिल्ली) में देशी पिस्टल बनाने का कारखाना है। एक पिस्टल के बदले वह 16 हजार की स्मैक लेते हैं। दिल्ली की सीलमपुर पुलिस से एएसपी ने संपर्क साधा है। उस व्यक्ति का नाम बता दिया गया है, जिससे सोनू और विजय असलाह खरीदते हैं। तस्करों ने पुलिस को बताया कि हाइवे पर फरीदपुर स्थित ढाबों से थोक में स्मैक मिलती है। कस्बे में भी नशे का एक बड़ा कारोबारी है। एएसपी ने बताया कि स्मैक की तस्करी करने वाले पूरे नेटवर्क का पता कराया जा रहा है। कुछ नाम भी आए हैं। उन्हें पकड़ने के लिए रणनीति बनाई जा रही है। 

बरेली के लाला की तलाश
नशे के सौदागरों ने बरेली के लाला समेत कई लोगों ने नाम बताए हैं। पुलिस उनकी तलाश करने में लगी है। यह पता लगाया जा रहा है कि लाला नाम के व्यक्ति का असली कारोबार क्या है। इसके अलावा उसका नेटवर्क कहां से है। झारखंड के कुछ लोगों के नाम भी आए हैं। जहां से स्मैक लाकर बरेली से दूसरे प्रदेशों को भेजी जा रही है। सेमलखेड़ा और पुराने शहर में स्मैक तस्करों का बड़ा नेटवक है। गंगापुर की महकिया से उत्तराखंड तक के लोग स्मैक खरीदने के लिए आते हैं। शहामतगंज चौकी की पुलिस से भी तस्करों ने साठगांठ कर रखी है। इसलिए खुलेआम स्मैक की बिक्री करने वाले अहमद को पुलिस नहीं पकड़ रही है। 
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स्कार्पियो से मिले 13 मोबाइल सिम
पुलिस ने दिल्ली के नशे के सौदागरों की स्कार्पियों से तेरह मोबाइल सिम बरामद किए हैं। इनको रखने के लिए कार में एक बॉक्स बना हुआ है। तस्कर इतने शातिर हैं कि उन्हें किसी पर यकीन नहीं होता है। माल देने और लेने वाले का कोड होता है। एक दूसरे को मैसेज से अपना कोड भेजने पर ही बात होती है। एक सिम से एक ही व्यक्ति से बात होती है। इसकी वजह से पुलिस आसानी से आरोपियों तक पहुंच ही नहीं पाती है। 
 
एक साथी उतरकर भाग गया था
नशे के तस्करों का एक साथी कार से रास्ते में ही उतरकर भाग गया था। एएसपी आकाश तोमर ने बताया कि विजय और सोनू के अलावा उनका तीसरा साथी था। वह पुलिस के पीछा करने पर रास्ते में ही कार के हल्की होने पर उतरकर भाग गया था। उसकी तलाश में टीम को लगा दिया गया है।   
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