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बबलू ने हाईकोर्ट से मांगी पैरोल पर रिहाई

Mon, 09 Feb 2015 01:14 AM IST
बरेली
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चौदह सालों से ज्यादा समय से जेल की सलाखों के पीछे कैद माफिया डॉन बबलू श्रीवास्तव अब कुछ समय अपने परिवार के साथ गुजारना चाहता है। बबलू ने हाईकोर्ट में पैरोल पर दो महीने की रिहाई के लिए रिट दाखिल की है। इस पर हाईकोर्ट में इसी महीने सुनवाई होगी।
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बबलू फिलहाल बरेली की सेंट्रल जेल में कैद है। ज्यादातर मुकदमों में उसे जमानत मिल चुकी है। उसने इसी आधार पर हाईकोर्ट में पैरोल पर रिहाई की गुहार लगाई है। वह इससे पहले जेल में 14 के चौदह सालों से ज्यादा समय कैद रहने के आधार पर फार्म-ए पर अपनी रिहाई का आवेदन भी शासन को भेज चुका है। यह आवेदन साल भर से शासन में लंबित पड़ा है। सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक एके राय ने बताया कि बबलू के पास नामी वकील हैं। वह पैरोल पर रिहाई के लिए अपनी पैरवी में कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। इसी महीने उसकी रिट पर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।

सरकारी वकील ने किया विरोध
हाईकोर्ट में पैरोल पर रिहाई के बाबत बबलू की रिट के खिलाफ सरकारी वकील विकास सहाय ने पांच फरवरी को शपथ पत्र दाखिल कर विरोध जताया है। सरकारी वकील का कहना है कि बबलू के वकील ने पैरोल के लिए जो ग्राउंड दिखाई है उसके तहत रिहाई संभव नहीं है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक बबलू को अपनी रिहाई की पूरी उम्मीद है।
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यह है फार्म-ए
वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि प्रोवेशन एक्ट 1932 के तहत किसी बंदी की सजा के 14 साल पूरे होने पर फार्म-ए के तहत रिहाई की कार्रवाई की जाती है। इसे लाइसेंस पर मुक्ति कहा जाता है। आवेदन में बंदी का पूरा ब्योरा दिया जाता है। उसके आचरण के बारे में भी जेल अफसरों को टिप्पणी लिखनी होती है। जेल से आवेदन डीएम के पास जाता है। डीएम की संस्तुति के बाद आईजी स्तर के अफसरों से होता हुआ शासन में पहुंचता है। शासन की संस्तुति के बाद राज्यपाल को बंदी की रिहाई कराने का अधिकार है।   

केजीएमयू में होगा मंगे के पीठ दर्द का इलाज
सेंट्रल जेल में ही बंद बबलू श्रीवास्तव का साथी मंजीत सिंह उर्फ मंगे पीठ दर्द से जूझ रहा है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका एमआरआई कराने के बाद उसे केजीएमयू लखनऊ रिफर कर दिया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि उन्होंने मंगे को लखनऊ भेजने के लिए फोर्स मांगी है।
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