ब्लड बैंक में खून मौजूद होने के बाद भी खून की कमी से गर्भवती की मौत सिस्टम पर बड़ा सवाल उठाती है। लखीमपुर से चली गर्भवती को पहले शाहजहांपुर और फिर बाद में बरेली तक लेकर घरवाले दौड़े लेकिन वह बची नहीं। पूरी दौड़ भाग में सेहत महकमे की लापरवाही हर स्तर पर देखने को मिली। नियमों की आड़ में भले ही इस लापरवाही को बांधा जाए लेकिन हकीकत में तो इस मौत का जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग के लापरवाह कर्मचारी ही हैं।
कदम कदम पर टालू रवैया
1- शाहजहांपुर अस्पताल
शाहजहांपुर महिला अस्पताल ने गर्भवती महिला को ट्रामा सेंटर भेज दिया। परिजनों का कहना है कि ट्रामा सेंटर ने ग्लूकोज चढ़ाने के बाद मरीज को बरेली ले जाने का दबाव बनाया। ब्लड बैंक शाहजहांपुर में भी है और महिला डॉक्टर भी। वहां भी खून चढ़ाकर आपरेशन किया जा सकता था। जिससे महिला बच सकती थी।
2- बरेली महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल की चिकित्सकों ने तुरंत खून तो पर्चे पर लिखकर भेज दिया। लेकिन महिला की स्थिति को लेकर न तो पैथालजी के स्टॉफ को सूचित किया और न ही प्रभारी को। सुबह 10 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक डोनर के लिए परिजन परेशान रहे। भटकते रहे, इंतजार करते रहे। अगर महिला डॉक्टर इमरजेंसी केस बताती तो शायद ब्लड बैंक से खून मिल जाता और महिला बच सकती थी।
3- ब्लड बैंक
ब्लड बैंक का स्टाफ भी डोनर के लिए अड़ गया। परिजन खून के लिए गिड़गिड़ाते रहे लेकिन स्टाफ ने एक न सुनी। महिला के पति का वजन 40 किलोग्राम था, जिसकी वजह से वह खून नहीं दे सका। सुबह करीब एक घंटा वे ब्लड बैंक में रहे और उसके बाद लौट कर अपने भांजे का इंतजार करने लगे। एक बजे भांजा आया तो उसने जाकर डेढ़ बजे खून दिया। महिला तब तक वह दम तोड़ चुकी थी।
- ब्लड बैंक तो कुछ और ही कह रहा
ब्लड बैंक अपनी ही बात में फंस रहा है। देवस्तुति के परिजनाें का कहना है कि 9:40 पर बरेली अस्पताल पहुंचने के बाद 10 बजे डॉक्टर ने खून लिख दिया। डॉक्टराें ने कहा कि हालत सीरियस है जल्दी खून लाओ। ब्लड बैंक गए तो वहां खून दिया ही नहीं। डोनर के लिए जिद करते रहे। फि र महिला अस्पताल लौट आए और भांजे का इंतजार किया। एक बजे भांजा आया तब डेढ़ बजे तक ब्लड बैंक गए और खून मिल गया। ब्लड बैंक स्टाफ ने अस्पताल से आए ब्लड के पर्चे पर डेढ़ बजे का समय अंकित किया है। उनका कहना है कि परिजन बाहर ही घूमते रहे। कुछ लोग तो खून खरीदने की बात भी कह रहे हैं, जबकि परिजनों का कहना है कि अगर उनके पास खून खरीदने के पैसे होते तो किसी प्राइवेट में ही भर्ती करा देते। फिर डेढ़ बजे अगर परिजन ब्लड बैंक पहुंचे भी थे तो मात्र 20 मिनट में रक्त क्रॉस मैच करके दे दिया।
वर्जन--
‘इमरजेंसी केस होने पर महिला अस्पताल से ही सूचना देनी चाहिए थी, ताकि तुरंत खून मिल जाए। लेकिन न तो इमरजेंसी लिखा और न ही फोन पर सूचना दी गई। देवस्तुति के तीमारदार भी डेढ़ बजे ब्लड बैंक में आए ।’
डॉ. यूवी सिंह, प्रभारी, ब्लड बैंक
‘शाहजहांपुर महिला अस्पताल के सीएमएस को जिम्मेदार डॉक्टराें से जवाब मांगने को कहा है। मंगलवार को कार्यालय खुलने पर संबंधित अन्य लोगाें से भी जवाब मांगा जाएगा।’
डॉ. सुबोध शर्मा, जेडी हेल्थ
- लखीमपुर के थाना पसगवां क्षेत्र के गांव खरगापुर निवासी 27 वर्षीय देवस्तुति को रविवार की रात 20.40 पर ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। उसकी हालत गंभीर थी। उसको झटके आ रहे थे और उसके शरीर में खून की मात्रा भी काफी कम थी। इसके साथ ही उसका ब्लड प्रेशर में कम हो रहा था। फुल टाइम प्रेग्नेंसी होने की वजह से उसकी हालत गंभीर हो रही थी। उसकी हालत को गंभीर देखते सुबह सात बजे उसे हायर सेंटर रेफर किया गया था
डॉ. केशव स्वामी, सीएमएस, जिला अस्पताल