आंवला में पुलिस ने शनिवार को कस्बे के त्रिपौलिया ढाल पर सट्टे के बड़े खेल का भंडाफोड़ किया। इस दौरान दो रसूखदारों बेटे भी पुलिस के हत्थे चढ़े। इनके पास से आठ मोबाइल, एक टेबलेट, 315 बोर की पौनिया और पांच जीवित कारतूस बरामद हुए हैं। इनमें एक के पिता पूर्व पालिका अध्यक्ष और दूसरे के पिता इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हैं। हालांकि पूर्व चेयरमैन का दूसरा बेटा फरार हो गया। कार्रवाई के दौरान पुलिस को काफी विरोध भी झेलना पड़ा। पुलिस दोनों युवकों को ले जाने लगी तो परिवारवालों और अन्य लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर काफी भीड़ इकट्ठा हो गई। बड़ी मुश्किल से पुलिस उन्हें शांत कर युवकों को ले जा पाई। भारत-आस्ट्रेलिया टेस्ट मैच पर सट्टा लगा रहे दोनों युवकों ने बताया कि उनका काम तो सिर्फ पार्टी का नाम और नंबर लिखना है। असली खिलाड़ी तो त्रिपौलिया के मोहित और विक्की हैं। वही लेन देन करते हैं।
कस्बे में सट्टेबाजी काफी बड़े पैमाने पर होती है। इसके तार कई सफेदपोशों से जुड़े हैं। खिलाड़ी बड़े-बड़े हैं, इसलिए पुलिस हाथ डालने से कतराती है। गाहे-बगाहे कुछ लोग हत्थे चढ़ते हैं पर बाद में छूट जाते हैं। शनिवार को मुखबिर से मिली सट्टेबाजी की सूचना के आधार पर सीओ संतोष कुमार सिंह और कोतवाल एसएस पवार ने त्रिपौलिया ढाल पर बने पूर्व पालिकाध्यक्ष रामपाल गुप्ता के बेटे मनोज के घर पर छापा मारा। यहां पुलिस को यहां तीन युवक मिले। इनके सामने मेज पर आठ मोबाइल, एक टेबलेट ओर 315 बोर की पौनिया के साथ पांच जीवित कारतूस रखे थे। ये युवक मोबाइल के जरिए सट्टेबाजी कर रहे थे। साथ में रजिस्टर में पार्टी के नाम और पते लिख रहे थे। भारी संख्या में पुलिस को देखकर तीनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। पुलिस ने तीनों को घेर लिया। इनमें दो कमलेश और मनोज पूर्व पालिकाध्यक्ष के बेटे और तीसरा चंद्रप्रकाश सरकारी सहायता प्राप्त सुभाष इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रेमपाल का बेटा निकला। पुलिस इन्हें बाहर लाकर वाहन में बैठाने लगी। इसी बीच परिवारवालों को सूचना मिली तो वे आ गए। शोर-शराबे पर आस के लोगों का भी मजमा लग गया। सभी ने मिलकर गिरफ्तारी का विरोध किया। पुलिस से भीड़ की खूब नोकझोंक हुई। सीओ और कोतवाल का लोगों ने जमकर विरोध किया। इसी दौरान मनोज पुलिस का घेरा तोड़कर मौके से भाग गया। इसके बाद पुलिस ने थोड़ी सख्ती दिखाई साथ ही लोगों को समझाया। इसके बाद ही बचे दोनों युवकों को पुलिस अपने साथ कोतवाली ले गई। मनोज की तलाश में दबिश दी जा रही है।
कोड वर्ड का करते हैं इस्तेमाल
पुलिस ने जो रजिस्टर बरामद किया है। उसमें सांकेतिक भाषा में लालू, मोटर,पुरुषोत्तम, नेताजी, घी, तेल जैसे नाम और उनके सामने रकम व हार-जीत की पहचान के लिए निशान बने हैं। पूछताछ मं दोनों ने पुलिस को बताया कि उनका काम तो पार्टी का नाम और नंबर लिखना है त्रिपौलिया के मोहित खंडेलवाल उर्फ डब्बू और विक्की असली खिलाड़ी हैं। सीओ ने बताया कि अलीगंज, सिरौली, बिशारतगंज में भी सट्टेबाजी की शिकायत मिल रही है।
तो मोहित और विक्की हैं मास्टर माइंड
पकडे़ गए दोनों युवकों ने बताया कि वे तो सिर्फ मोहरा हैं। असली लेन-देने तो त्रिपौलिया के मोहित और डब्बू करते हैं। बता दें कि कुछ समय पहले मोहित और डब्बू सट्टेबाजी में पकड़े जा चुके हैं। कुछ दिन बाद इन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद ये फिर धंधे में लग गए।
एमबीए है चंद्रप्रकाश
पकड़े गए प्रिंसिपल के बेटे चंद्रप्रकाश ने एमबीए कर रखा है। इसके बावजूद चंद्रप्रकाश का इस धंधे से जुड़ने को लेकर लोग आश्चर्य चकित हैं। वहीं, चंद्रप्रकाश का कहना है कि वह तो मनोज के घर स्कूल फीस के रुपये लेने मनोज के घर गया था। उसका इस धंधे से कोई लेना-देना नहीं है।
तीन लोग कर चुके हैं आत्महत्या
आंवला। सट्टेबाजी का जाल कस्बे में किस कदर फैला है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तीन लोग इसी चक्कर में आत्महत्या कर चुके हैं। सट्टा लगाकर लाखों के कर्जदार होने के बाद दो व्यापारी व एक युवक के पिता आत्महत्या कर चुके हैं। एक साल पहले कस्बे के व्यापारी बब्बू ने देनदारी अधिक होने पर फांसी लगा ली थी। त्रिपौलिया ढाल का मोनू देवल मैच में सट्टा लगाने पर लाखों का कर्जदार हो गया तो घर छोड़कर चला गया था। कर्जदारों के तकादे से परेशान होकर उसके पिता तेजपाल ने आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा कस्बे के ही व्यापारी सुधीर रस्तोगी ने चार साल पहले कर्जा अदा न कर पाने की वजह से सिटी रेलवे स्टेशन के पास पेड़ से लटककर जान दे दी थी।