जिले के प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलाें में जितने बच्चाें को दूध पिलाया जा रहा है उतने दूध की सप्लाई तो शहर में भी नहीं है। मथुरा में मिड डे मील का दूध पीने के बाद परिषदीय विद्यालयाें के शिक्षक डरे हुए हैं। गर्मी में दूध कैसा होगा इसको लेकर शिक्षक भी विरोध जताने के अंदाज में दिख रहे हैं। इस मामले पर वे बीएसए से वार्ता करेंगे।
तीन लाख 35 हजार बच्चे परिषदीय विद्यालयाें में पढ़ते हैं। प्राथमिक विद्यालय के एक बच्चे को 150 और जूनियर हाईस्कूल के छात्रों को 200 मिली दूध दिया जाना है। शहर में मिड डे मील बांट रहे राष्ट्रीय निर्मल उत्थान संस्थान के सुरेश कुमार कहते हैं कि पहले वे पराग से दूध लेते थे, लेकिन मुरादाबाद से सप्लाई हुई तो शहर के ग्वालों से ही दूध लेते हैं। इसकी जांच भी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से करा चुके हैं। हालांकि हर बार यह जांच नहीं हो पाती। दूध उबालकर उसमें चीनी मिलाते हैं और खुद पीते हैं। इसके बाद रवानगी होती है।
... आखिर कहां से आ रहा यह शुद्ध दूध
जानकारी के मुताबिक जिले में एक लाख आठ हजार लीटर दूध की डिमांड हैं। इसके सापेक्ष केवल 90 हजार लीटर दूध की आपूर्ति हो रही है। इसमें 20 हजार लीटर सड़क के माध्यम से आता है और 20 हजार लीटर पैकेट कंपनी का दूध है। 403 डेयरी कुल 50 लीटर दूध की जरूरत पूरा करती हैं। ऐसे में तीन लाख 35 हजार बच्चों को छह करोड़ 70 लाख मिली लीटर यानी 67 हजार लीटर दूध चाहिए।
- मिलावटी दूध से बच पाना चुनौती
विभाग बच्चों को मिलावटी दूध से कितना बचा पाता है यह उसके लिए चुनौती होगी। इस समय पैकेट का दूध 48 रुपये लीटर और डेयरी का दूध 45 से 50 रुपये प्रति लीटर है। इस तरह से 200 मिली दूध की कीमत करीब 10 रुपये होगी। अलग से बजट है नहीं। इस समय मिलावटी दूध का बाजार करीब 30 हजार लीटर है।