बरेली। आबकारी विभाग को शक है कि जगतपुर में जहरीली शराब बनाने की फैक्ट्री चला रहे लोगों को पहले ही छापे की भनक लग गई। यही वजह रही कि छापे से ऐन पहले वे फैक्ट्री छोड़कर फरार हो गए और छापा मारने वाली टीम को मौके पर कोई भी नहीं मिला। आबकारी अधिकारियों का कहना है कि छापे से पहले उन्होंने जगतपुर पुलिस चौकी को इसकी सूचना दी थी। उनका प्लान फुलप्रूफ था। फिर भी मौत के सौदागरों का उनकी कार्रवाई से पहले भाग निकलना हैरान करने वाला है। नकली शराब की यह फैक्ट्री पुलिस चौकी से कुछ ही दूरी पर चल रही थी।
सुधीश भटनागर अवैध शराब बनाने के धंधे का पुराना खिलाड़ी है। तीन महीने पहले बुखारपुरा में भी शराब की अवैध फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद उसका नाम सामने आया था, लेकिन सुधीश भटनागर को पुलिस जेल में कैद नहीं रख सकी और उसने बुखारपुरा छोड़कर जगतपुर में अवैध शराब की फैक्ट्री शुरू कर दी। जगतपुर में कितने बड़े पैमाने पर नकली शराब बनाई जा रही थी, इसका अंदाजा यहां बरामद हुए शराब की बोतलों के करीब 1.17 लाख ढक्कन, 1578 क्यूआर कोड, सवा लाख वार्सल आदि सामान से लगाया जा सकता है। आबकारी विभाग को यह सामान जब्त करने के लिए मिनी ट्रक मंगाना पड़ा।
तड़पा-तड़पाकर मारती है रेक्टिफाइड स्प्रिट से बनी शराब
रेक्टिफाइड स्प्रिट बेहद घातक होती है। शरीर में जाते ही अंदरूनी अंगों पर इसका दुष्प्रभाव शुरू हो जाता है। इसकी अत्यधिक मात्रा किसी भी शख्स की फौरन जान ले सकती है। अगर ऐसा न भी हो तो रेक्टिफाइड स्प्रिट का लगातार सेवन करने से शरीर के अंदरूनी अंग बेकार होने लगते हैं और इसे पीने वाला व्यक्ति फिर दर्दनाक मौत का शिकार बनता है। नकली शराब के धंधेबाज आमतौर पर एक लीटर रेक्टिफाइड स्प्रिट में पानी मिलाकर कई गुना ज्यादा नकली शराब बनाते हैं। ब्रांड के जैसा रंग देने के लिए इसमें कुछ केमिकल भी मिलाए जाते हैं जिसके बाद यह और ज्यादा घातक हो जाती है।
देसी-अंग्रेजी के तमाम ब्रांड की नकली शराब
आबकारी विभाग की टीम को सुधीश भटनागर के मकान से सुपीरियर आसवनी बरेली, रेडिको खेतान रामपुर, पिलखनी सहारनपुर, एनआईसीएल मुरादाबाद उन्नाव आसवनी आदि की शराब की बोतलों और पव्वों के ढक्कन मिले हैं। आबकारी विभाग के अधिकारियों को शक है कि इन शराब कारखानों के स्टाफ की भी नकली शराब के धंधेबाजों से साठगांठ हो सकती है। धंधेबाज धन्नो पीके आई डायमंड, सोलजर, विंडीज, फाइटर, कैपिटल आदि नामों से अंग्रेजी और देशी शराब तैयार कर ऑनडिमांड सप्लाई करते थे। पुलिस की भी मिलीभगत का अंदेशा जताया जा रहा है। फैक्ट्री पर छापा मारने वाली टीम में वरिष्ठ निरीक्षक सिद्धार्थ गौतम मिश्रा, विनय निमेष, अमित मिश्रा समेत दस निरीक्षक और सिपाही शामिल थे।
नकली शराब बनाने में माहिर सुधीश
नकली शराब बनाने की तकनीकी जानकारी रखने वाला सुधीश भटनागर अवैध फैक्ट्री में अल्कोहल मीटर भी इस्तेमाल करता है। इसी से शराब की तीव्रता मापी जाती है। मौके पर मिली करीब 60 लीटर रेक्टिफाइड स्प्रिट 85 प्रतिशत तीव्रता की थी। इससे हजारों बोतल शराब बनाई जा सकती थी। मौके पर दो केन में रंग भी मिला।
अभियुक्तों पर लगेगा गैंगस्टर एक्ट
थाना बारादरी में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस प्रशासन सुधीश भटनागर और उसके सहयोगियों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करने में जुट गया। पुराना शहर में तीन महीने में दूसरी बाद नकली शराब बनाने का कारखाना पकड़े जाने के बाद कई कयास लगाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि पुराना शहर में पीलीभीत बाईपास से सटे ज्यादातर स्थानों पर नई आबादी बसी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कई स्थानों पर चोरी छिपे अवैध धंधे यहां पनप रहे हैं।