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पुलिस पर अब चुनाव का बहाना, तस्करों को और आसान हुआ शहर के बीच पशु उठाना

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बरेली। अगर शहर की सड़कों पर अब आपको गोवंशीय पशुओं की भरमार नजर नहीं आती तो यह मान लेने की जरूरत नहीं है कि योगी सरकार में इन पशुओं को कहीं ऐसी गौशाला में पहुंचा दिया गया है जहां उनके लिए रहने-खाने का अच्छा बंदोबस्त है। असलियत तो यह है कि गोरक्षा के साथ यूपी की सत्ता में आई योगी सरकार में अब फिर गोवंश पर संकट बढ़ने लगा है। एक तरफ पुलिस को चुनाव का बहाना मिल गया है तो दूसरी तरफ पशु तस्करों का हौसला इस कदर बुलंद है कि वे अब शहर भीड़भाड़ वाले प्रमुख स्थानों से भी गाय-बैलों को उठाने से बाज नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार रात नगर निगम के गेट के सामने कुछ गायों को एक कार में लादने की कोशिश कर रहे पशु तस्करों ने टोकने पर यहां से गुजर रहे लोगों पर हमला कर दिया।
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चुनाव के शोर में पुलिस का पूरा फोकस कैश और जेवरों की धरपकड़ पर है। दूसरी तरफ पशु तस्करों को पूरा मौका मिल गया है। वे शहर के बीचोंबीच पशुओं को लग्जरी गाड़ियों में लादकर ले जा रहे हैं। शुक्रवार रात करीब तीन बजे नगर निगम मेन गेट के सामने खड़ी गोल्डन कलर की लक्जरी कार में घुमंतू पशुओं को भरने की कोशिश कर रहे पशु तस्करों को कुछ लोगों ने टोका तो वे हमलावर हो गए। उन्होंने उनके साथ न सिर्फ मारपीट की बल्कि एक तस्कर ने तमंचा भी तान दिया। हमले का शिकार हुए लोग अयूब खां चौकी पर पहुंचे तो वहां सिर्फ एक होमगार्ड मिला। होमगार्ड की सूचना पर चीता पुलिस मौके पर आई। पुलिस बाइक का सायरन बजाती बरेली कॉलेज की ओर बढ़ी तब तक तस्कर फरार हो गए।

दुकानदार बंद कर लेते हैं कैमरे
देर रात की घटना के बाद शनिवार को देखा गया तो नगर निगम गेट पर तो कैमरा मिला ही नहीं। सामने की मार्केट में कई दुकानों पर बाहरी साइड पर कैमरे लगे थे। इनमें से कुछ खराब थे तो कई ने बताया कि वे रात में अपने कैमरे बंद कर जाते हैं। ऐसे में सवाल ये भी है कि रात के वक्त चोरी लूट जैसी किसी घटना के बाद भी पुलिस को खुलासे के लिए ठोस साक्ष्य नहीं मिलने वाला। हालांकि एसपी क्राइम रमेश भारतीय ने इस संवेदनशील मामले में अपनी टीम लगाकर संबंधित स्थल की एक वीडियो फुटेज निकलवाई है। वे उसे चेक करा रहे हैं।
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नवाबगंज पुलिस पर कई बार हो चुका हमला
नवाबगंज इलाके में पशु तस्कर कितने बेखौफ हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे जनवरी से अब तक तीन बार पुलिस पर हमला कर चुके हैं। 20 जनवरी को पीलीभीत हाईवे पर हरदुआ गांव के सामने एक होंडा सिटी कार में चार गोवंशीय पशुओं को जा रहे तस्करों को रोकने पर पुलिस टीम पर हमला किया गया। 17 फरवरी को टांडा सादात गांव में मांस तस्करी की सूचना पर कोतवाल श्रीकांत द्विवेदी व पुलिस टीम पर फायरिंग की गई। तस्कर जंगल के रास्ते से फरार हो गए। दिसंबर में बरेली पीलीभीत हाईवे पर लभेड़ा गांव के पास पुलिस ने लक्जरी कार में भरकर ले जा रहे तस्करों को टोका तो उन्होंने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। तस्कर यहां भी फरार हो गए। पुलिस केवल कार और पशु बरामद कर सकी।

फरीदपुर में की थी दरोगा की हत्या
पशु तस्करों को पकड़ने गए फरीदपुर कोतवाली के दरोगा मनोज मिश्रा की 10 सितंबर 2015 की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 14 लोगों को नामजद कर जेल भेजा। लखीमपुर से आए परिजनों ने इस मामले में तत्कालीन सपा सरकार व पुलिस विभाग के ही कुछ लोगों पर आरोप लगाए थे। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की थी। राजनैतिक गलियारों में घटना की लखनऊ तक गूंज हुई थी।

शहर में पशु तस्करों की गतिविधियां और लोगों पर हमलावर होना गंभीर मामला है। इस मामले में स्थानीय पुलिस से जानकारी ली जाएगी। पुलिस को और चौकस रहकर पशु तस्करों पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। - राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी बरेली रेंज
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