बरेली। जिंदा हाथी लाख का.. मरे तो सवा लाख का, मोबाइल चोरों के लिए भी यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। मोबाइल का आईएमईआई नंबर बदलकर सर्विलांस सिस्टम से बचने के लुकाछिपी के खेल को खत्म करने के लिए चोर बाजार के खिलाड़ियों ने मोबाइल को खोलकर पार्ट-पार्ट अलग करके बेचने का नया ट्रेंड अपना लिया है। इससे सर्विलांस से लोकेशन का पता लगने का खतरा ही खत्म हो गया है। क्राइम ब्रांच ने मोबाइल लुटेरे और चोरी के मोबाइल खरीदने वाले दुकानदार को पकड़कर मोबाइल के पार्ट-पार्ट अलग कर उन्हें खपाने के काला कारोबार को उजागर किया है।
क्राइम ब्रांच ने पूरनापुर के जितेंद्र को हाफिजगंज में हुई बाइक और मोबाइल लूट की वारदात में पकड़ा है। पूछताछ में उसने चोरी के मोबाइल खरीदने वाले हरुनगला के महाकाल कम्यूनिकेशन के कपिल के नाम का खुलासा किया तो पुलिस ने उसे भी उठा लिया। दोनों से पूछताछ में चोरी के मोबाइल को बाजार में खपाने का नया नेटवर्क सामने आया है। जितेंद्र के मुताबिक अब चोरी के मोबाइल को बाजार में यूं ही नहीं बेचा जाता। दुकानदार मोबाइल लेने के बाद उनके पार्ट अलग-अलग कर बेचते हैं। कपिल ने बताया कि चोरी का मोबाइल 1500 रुपये तक में खरीदने के बाद मोबाइल के पार्ट्स करीब सात से आठ हजार रुपये तक का मुनाफा दे जाते हैं।
बाजार में हर महीने लाखों के मोबाइल पार्ट की खपत
पुलिस कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक औसतन 800 मोबाइल की गुमशुदगियां थानों में पहुंच रही है। सर्विलांस लोकेशन ट्रेस करने के लिए इनमें से सिर्फ 30 फीसदी मोबाइल पहुंचते हैं। बीते कुछ महीनों में आपराधिक वारदातों को छोड़कर लूट और चोरी गए मोबाइल ट्रेस नहीं हो रहे थे। जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने मोबाइल चोरी करने वाले गिरोहों की धरपकड़ की। पूछताछ में हर महीने लाखों रुपये के मोबाइल पार्ट खपने की बात सामने आई।
मोबाइल पार्ट्स का चोर बाजार
मोबाइल पार्ट वास्तविक चोर बाजार के
बैक लाइट 500-700 100
सिम कार्ड एडॉप्टर 200-250 50-60
डिसप्ले 1500- 3000 1000-1200
मदर बोर्ड 2000-2500 700-1000
माइक, रिंगर 100-200 50-60
चार्जिंग जैक 100-200 50-60
(मोबाइल दुकानदारों की बातचीत पर आधारित रेट लिस्ट)
क्राइम ब्रांच ने पूरनापुर के जितेंद्र और हरुनगला से कपिल को पकड़ा है। उनसे हुई पूछताछ में मोबाइल पार्ट खोलकर बेचने के बड़े कारोबार का खुलासा हुआ है। - रमेश भारतीय, एसपी क्राइम