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सन्न रह गए मोहल्ले वाले, कई घरों में नहीं बना खाना

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बरेली।
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जंक्शन से चौपुला चौराहे जाने वाली माल गोदाम रोड पर चाय-पकौड़ी बेचने वाले महेश शर्मा उर्फ राजू और उनके परिवार की हादसे में मौत होने की जैसे ही रविवार सुबह छह बजे मथुरा से मनहूस खबर आई, वैसे ही उनका छोटा भाई विनय और बूढ़ी मां सीता रानी फफककर रोने लगीं। सुबह महेश के घर से रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोग आ गए। परिवार के नौ लोगों की मौत की जिसने खबर सुनीं, वह सन्न रह गया। इससे पूरे मोहल्ले में मातम सा छा गया। पड़ोस के कई घरों में खाना नहीं बना। विनय तो तुरंत मथुरा चले गए। घर में उनकी बूढ़ी मां ही बचीं। सभी विलाप कर रहीं महेश की बूढ़ी मां को तसल्ली देकर समझाते रहे। दोपहर में उनकी बड़ी बेटी किरन संपूर्णानगर से आ गईं। किरन कह रही थीं कि भइया ने रक्षाबंधन पर बुलाने का वायदा किया था, इससे पहले ही हादसा उन्हें और परिवार को निगल गया।

बेहद मेहनत करके पाला, एक पल में छीन लिया मेरे लाल को
बुजुर्ग सीता रानी शर्मा ने अपने बेटे महेश और विनय, बेटी किरन और पूनम को बेहद मेहनत कर पाला था। एक हादसे ने उनके बेटे महेश और बेटी पूनम को उनसे पलभर में छीन लिया। सीतारानी के पति ब्रह्मदत्त शर्मा जंक्शन से चौपुला चौराहा जाने वाली माल गोदाम रोड पर चाय की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। बच्चे छोटे-छोटे ही थे, तभी 1985 में ब्रह्मदत्त शर्मा की मौत हो गई थी। इसके बाद सीता रानी खुद ही दुकान चलाने लगीं और बेटे-बेटी बड़े हुए तो उनके ब्याह किए। करीब बीस साल पहले दुकान में चाय बनाते हुए स्टोव फट गया था, जिससे सीता रानी गंभीर रूप से झुलस गईं थीं। इसके बाद महेश ने चाय पकौड़ी की दुकान संभाली और परिवार को पाला। छोटे भाई विनय का चाय की दुकान के पास ही पान-मसाले का खोखा रखवा दिया, जिससे उनकी जिंदगी पटरी पर आ गई। सीता रानी रो-रोकर कह रहीं थीं कि उन्होंने बेहद मेहनत से अपने बेटे -बेटियों को पाला था। मनहूस हादसे ने एक पल में महेश और पूनम को उनसे छीन लिया।
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पहली बार बाहर घूमने निकले महेश का पूरा परिवार ही खत्म हो गया
बरेली। महेश शर्मा ने चाय-पकौड़ी की दुकान से होने वाली कमाई से परिवार चलाने के साथ ही अपनी बेटी खुशबू, मानसी, पुत्र रितिक, हार्दिक की पढ़ाई जारी रखी। खुशबू बीएससी में, हार्दिक कक्षा नौ में, रितिक कक्षा 10 में पढ़ता था, जबकि मानसी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। नौ तारीख को उसका रिजल्ट आया तो फर्स्ट क्लास पास होने पर घर में खुशी का ठिकाना न रहा। बच्चों ने इस खुशी का इजहार करने को कहीं घूमने का मन बनाया। कार्यक्रम बना बाला जी के दर्शन का। हाल ही में महेश की बहन पूनम बेटे रोहन और बेटी सुरभि के साथ महेश के घर आई र्हुइं थी। ये सब भी महेश के परिवार के साथ बाला जी के दर्शन को चल दिए। परिवार कहीं पहली बार घूमने निकला था और उसे हादसा निगल गया।

सबके बैग में रखे दस दस हजार, कहा खूब खर्च करना
हाड़ तोड़ मेहनत कर परिवार को पालने वाले महेश बेहद खुशमिजाज थे। वह परिवार को हर खुशी देना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने बच्चों के कहने पर बाला जी जाने का कार्यक्रम मना लिया। शनिवार रात बाला जी रवाना होने से पहले महेश ने सभी बच्चों को दस-दस हजार रुपये देकर उनके बैग में रखवा दिए और कहा, घूमने के दौरान जिसको जो चीज पसंद आए वह खरीद ले।

बच्चों ने कहा था जो पैसे बचेंगे दादी को लाकर देंगे
जब महेश ने सभी बच्चों के बैग में दस-दस हजार रुपये रखे तो वे बेहद खुश थे। बच्चों ने भी कहा कि वह सोच-समझकर खर्च करेंगे। जितना पैसा बचेगा वह दादी को वापस लाकर देंगे। बच्ची की मौत की जानकारी पर दादी सीता रानी कह रही थीं कि अब उन्हें कौन पैसे वापस लाकर देगा।

विनय की पत्नी विनीता चली गई मायके
महेश के छोटे भाई विनय की पत्नी विनीता बच्चों की गर्मी की छुट्टी होने पर हाल ही में अपने मायके चली गईं थीं। विनय अपनी दुकान के चक्कर और मां की देखभाल के लिए रह गए थे। लोग कह रहे थे कि अच्छा रहा कि विनय की पत्नी यहां नहीं थी नहीं तो जिद करने पर वह भी बाला जी जातीं।
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केंद्रीय मंत्री ने जताया दुख, प्रशासन से हर संभव मदद को कहा
बरेली। मथुरा में बरेली के महेश शर्मा और उनके परिवार समेत दस लोगों की मौत का मामला संज्ञान में आने पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने बेहद दु:ख जताया। उन्होेंने तुरंत मथुरा जिला प्रशासन और वहां के सीएमओ से फोन पर संपर्क कर मृतकों के परिवारवालों की हर संभव मदद कर जल्द से जल्द औपचारिकताएं पूरे करने के निर्देश दिए। इसके बाद बरेली स्थित आवास से कार्यकर्ता को भेजा और संवेदना जताई।
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