बरेली। गंगाशील अस्पताल में अटेंडेंट के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी दोनों सगे भाइयों को बीस-बीस साल कैद की सजा सुनाई। दोनों पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी डाला गया है। दोनों आरोपी गंगाशील अस्पताल के ही कर्मचारी थे। शनिवार को अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया था। इस मामले में तीन डॉक्टरों समेत अन्य आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया था।
गंगाशील अस्पताल में सामूहिक दुष्कर्म की यह घटना 14 जुलाई 2013 को हुई थी। 16 जुलाई को थाना प्रेमनगर में दर्ज कराई गई एफआईआर में पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी गंगाशील अस्पताल में डॉ. शालिनी माहेश्वरी की अटेंडेंट थी। 14 जुलाई को वह ड्यूटी पर थी। दोपहर दो बजे उसे डॉ. निशांत गुप्ता के अटेंडेंट शिवराज ने फर्स्ट फ्लोर पर काम करने के बहाने बुलाया। जैसे ही वह फर्स्ट फ्लोर के कमरे में पहुंची, शिवराज के भाई नरसिंह जो इसी अस्पताल में अटेंडेंट था, उसने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद पहले शिवराज ने उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया और फिर नरसिंह ने भी दुष्कर्म की कोशिश की। अस्पताल वालों ने बुरी तरह जख्मी हालत में ही उनकी बेटी को घर भेज दिया।
एफआईआर के मुताबिक पीड़िता ने घर आकर पूरी घटना बताई तो उन्होंने डॉ. शालिनी को फोन किया, जिस पर उन्होंने उसे अस्पताल बुलाकर उसका अल्ट्रासाउंड और इलाज कराया। पैसे का लालच देकर उसे मुंह बंद रखने को कहा। उसने एफआईआर कराने की बात कही तो उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता के पिता ने कहा था कि 15 जुलाई को उन्होंने पुलिस के पास जाने की कोशिश की लेकिन जान का खतरा देखकर घर से बाहर नहीं निकल सके। इसके बाद उन्होंने 16 जुलाई को अभियुक्त शिवराज और नरसिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। विवेचना करने के बाद पुलिस ने गंगाशील अस्पताल के डॉ निशांत, डॉ. शालिनी, डॉ. दुष्यंत, मैनेजर संकेत बाली और मनीष वैष्णव के खिलाफ भी अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
अदालत में गवाही के दौरान अभियोजन की ओर से कुल चौदह गवाह पेश किए गए। अभियोजन की ओर से सरकारी वकील जावेद अली खां और वादी के निजी वकील शंकर सक्सेना ने पक्ष रखा। अपर सत्र न्यायाधीश कृष्ण यादव ने शनिवार को अभियुक्त शिवराज और नरसिंह को दोषी ठहराते हुए बाकी अभियुक्तों को बरी कर दिया। सोमवार को सजा के प्रश्न पर अभियोजन की ओर से अभियुक्तों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अदालत से फरियाद की गई। मंगलवार को अदालत ने नरसिंह और शिवराज को 20-20 साल की कैद और पच्चीस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अभियुक्त शिवराज घटना के बाद से ही जेल में है।