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जिला पंचायत के कामों में 36.28 लाख का घपला

Sat, 12 Aug 2017 01:39 AM IST
बरेली
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बरेली। जिला पंचायत के चार साल पहले के कामों में ऑडिट टीम ने 36 लाख से अधिक बजट के दुरुपयोग का मामला पकड़ा है। ऑडिट टीम ने एक अप्रैल 2014 से 20 जुलाई 2016 तक किए गए ऑडिट में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष नीरू पटेल, अपर मुख्य अधिकारी मनीष कुमार, जेई नगीनाराम, जेई और वित्त परामर्शदाता रामकुमार मौर्य की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं। 
ऑडिट टीम के अनुसार जिला पंचायत में वर्ष 2013-14 में कराए गए कामों तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष पर किरायेदारों पर शासनादेश की दरों से किराया न बढ़ाकर सरकारी संस्था को लगातार हानि पहुंचाने, एएमए मनीष कुमार पर 51.16 लाख रुपये शासन से अवमुक्त होने के बाद भी अनुदान पर बैंक जमा पर ब्याज को शासन के नियमों के विपरीत वापस न करके अपने पास रखने, वर्ष 2011-12 में कैश बुक में अंकित करने के बाद भी 4.16 लाख रुपये के योग में सुधार न करने, 18.098 लाख रुपये बिना किसी आधार और शासनादेश के सोलर लाइट लगाने और उसको कार्यवाही में दर्ज न करने में लापरवाही की। ऑडिट टीम ने तत्कालीन अध्यक्ष के अलावा एएमए मनीष कुमार, जेई राम कुमार मौर्य को 1.53 लाख रुपये शासनादेश के विरुद्ध  चिकित्सा वेतन डेपुटेशन प्राप्त करने, 23.39 लाख रुपये निर्माण कार्य पर व्यय सामग्री आपूर्ति से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत न कर पाने, गिट्टी, मौरंग, बालू पर रायल्टी जमा चालान उपलब्ध न कराने के अलावा इन कामों पर पीडब्ल्यूडी, आरईएस, मंडी परिषद से अनापत्ति प्रमाण पत्र करने, 12.12 लाख रुपये अनुदान की अवशेष राशि शासन को वापस न करने, जेई नगीनाराम को शिफ्टिंग ऑफ मेटेरियल में 70 हजार के भुगतान में वित्तीय दुरुपयोग का दोषी ठहराया है। ऑडिट टीम का कहना है कि जिला पंचायत में शासनादेश के अनुसार 47 ठेकेदारों से दुकानों का किराया नई दरों से न लेकर पुरानी दरों से लिया गया जिसकी वजह से संस्था को करोड़ों के राजस्व का नुकसान होता रहा। इन किराएदारों से पांच साल का पुराना किरायेदार मानकर किराये की गणना की जाए तो ये किराया कम से कम पांच बार बढ़ना चाहिए था। बिना सरकारी आदेश के 18.98 लाख की सोलर लाइटें लगाने को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना गया है। पांच बिंदुओं पर जांच के बाद स्पष्टीकरण मांगते हुए दोषियों पर कार्रवाई की अपेक्षा की गई है। 
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1- वह शासनादेश दिखाएं, जिसके आधार पर ये काम कराए गए
2- कार्य कराने की मांग किसके द्वारा की गई
3- पंचायत बोर्ड में पास प्रस्ताव संख्या और उनकी डिटेल
4- सोलर लैंप कहां-कहां लगे। उनकी मरम्मत और रखरखाव का दायित्व किसका है। 
इन किराएदारों से लिया नाम मात्र का किराया 
दुर्गेश कुमार- किशोर बाजार, मुरारीलाल शर्मा, ऊषा जैन- करलौन, विशेश बिहारी माथुर-जिला पंचायत परिसर, अनवर खां, सुरेंद्र सिंह, सुलखान सिंह, मोहन सिंह- मॉडल टाउन, मनोज कुमार-श्यामगंज, हरिकृष्ण गुप्ता, हरविंदर-मढ़ीनाथ, हरीशचंद्र तलवार-सिविल लाइंस, सुखदेव शर्मा- आंवला, प्रबंधक साहित्य कला-कुवंरपुर, इफ्तेखार हुसैन-बिहारीपुर, अभय जौहरी- जिला पंचायत, अब्दुल रउफ-सूफी टोला, पु़लिस चौकी-सिरसा, पुलिस चौकी-जगतपुर, अशर्फीलाल और बिहारीलाल- दुनका, गंगेई और मालदेई-पुराना रुपताल, सुभाषचंद्र, गोपाल कृष्ण, बाबूराम, सतीशचंद्र गुप्ता, मोहम्मद इस्माइल, ओमशंकर गुप्ता, चतर सिंह, सुरेश कुमार रस्तोगी, फिरोज तुगलक, अब्दुल लतीफ, अब्दुल रउफ, जमुना प्रसाद, रामकिशन, हरिनारायन, राजकुमार -बहेड़ी, मालिकचंद्र, बशीर अहमद, सत्यनारायन, दिनेश कुमार, प्रदीप कुमार, प्रदीप कुमार मेहरोसान, प्रबंधक गांधी आश्रम, श्री राम, सत्यभान और केवल कृष्ण (सब नवाबगंज) 
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कोट-- 
ऑडिट एक सामान्य प्रक्रिया है। जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपना काम पूरी इमानदारी और नियमानुसार किया। ऑडिट में उठाई गई आपत्तियां व्यक्तिगत नहीं बल्कि तत्कालीन अधिकारियों पर हैं। तत्कालीन अफसर ही इन आपत्तियों का जवाब देंगे।  वीरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक   
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